क्या अपने ही लोगों से भिड़-भिड़ कर थक गए थे उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, कहीं जस्टिस वर्मा का मामला तो नहीं है वजह

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नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का इस्तीफा राजनीतिक हलकों के अलावा पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। भले ही उन्होंने इसका कारण स्वास्थ्य बताया हो, लेकिन किसी को इस पर भरोसा नहीं हो रहा। अपनी बात के लिए अड़ जाने वाले, बिना यह सोचे कि सामने वाला बुरा मान जाएगा काला को काला और सफेद को सफेद बताने वाले धनखड़ ने यूं ही इस्तीफा नहीं दिया। कहा तो यह जा रहा है कि वे अपनों से लड़ते-भिड़ते शायद थक गए थे।

धनखड़ के इस्तीफे की सबसे बड़ी वजह जस्टिस वर्मा का मामला माना जा रहा है। धनखड़ ने राज्यसभा में जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाया गया महाभियोग प्रस्ताव मंजूर कर लिया, वो भी सरकार की मर्जी के बिना। सरकार चाहती थी कि प्रस्ताव पहले लोकसभा में आए, ताकि उस पर रणनीति बनाई जा सके, लेकिन जगदीप धनखड़ ने इसे सीधे राज्यसभा में रख दिया। सरकार महाभियोग प्रस्ताव को पहले लोकसभा में पारित कराना चाहती थी. इसे सरकार की सफलता के रूप में प्रचारित किया जाता और न्यायपालिका को एक स्पष्ट संदेश दिया जाता, लेकिन विपक्ष ने पहले बाजी मार ली।

कई बड़ों को पसंद नहीं थी उनकी मुखरता

जगदीप धनखड़ अपनी मुखरता के लिए पहचाने जाते हैं। उपराष्ट्रपति के तौर पर जगदीप धनखड़ कई बार न्यायपालिका की स्वतंत्रता और जवाबदेही को लेकर खुलकर बोलते रहे। इससे सरकार और जजों के बीच माहौल थोड़ा तनावपूर्ण हो गया था।

किसानों को लेकर शिवराज को भी नहीं छोड़ा

पिछले साल दिसंबर 2024 को मुंबई में एक कार्यक्रम में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी मौजूद थे, तब जगदीप धनखड़ ने किसानों की चिंताओं पर उनसे जो सवाल पूछा वह काफी दिनों तक चर्चा में बना रहा। उन्होंने पूछा था कि कृषि मंत्री जी, किसानों से जो वादा किया गया था, और वादा क्यों पूरा नहीं हुआ? हम किसान और सरकार के बीच कोई सीमा रेखा क्यों बना रहे हैं? उन्होंने जोर देकर कहा कि किसान का तनाव नीतिगत गड़बड़ी को दर्शाता है, और उनकीसहनशीलता की परीक्षा लेनादेश के लिए भारी पड़ सकता है। इसके कुछ दिन बाद ही धनखड़ ने शिवराज को राज्यसभा में किसानों का लाडला भी कह डाला था।

मंत्रियों से कई बार टकराहट

सरकार के मंत्रियों से भी धनखड़ कई बार टकरा चुके हैं। संसद की एक कमेटी मीटिंग में जब वरिष्ठ मंत्री जेपी नड्डा और किरेन रिजिजू मीटिंग में नहीं आए तो धनखड़ ने खुद को अपमानित महसूस किया। जेपी नड्डा ने सदन में यहां तक कह दिया था कि कुछ भी रिकॉर्ड में नहीं आएगा, जिससे धनखड़ काफी आहत हुए। बाद में जेपी नड्डा ने कहा कि यह बयान चेयर के लिए नहीं था, बल्कि विपक्ष के लिए था।

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