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गणतंत्र दिवस: भारतीय संविधान का गौरव और राष्ट्रीय पर्व
भारतीय संविधान हर भारतवासी के गौरव और स्वाभिमान का भी विषय है आजकल भारतीय संविधान और संविधान के निर्माता राजनीतिक अखाड़े के टूल बने हुए है हर राजनीतिक दल के अपने अपने दावे हैं हर राजनीतिक दल अपने आपको संविधान का रक्षक और संविधान निर्माता के प्रति अपनी निष्ठा जताने में लगा है देश में इन दिनों चहुँ ओर संविधान और संविधान निर्माता के नाम की गूँज है कोई रैली निकाल रहा है तो कोई अभियान चला रहा है हर कोई अपने अपने तरीके से इन्हें भुनाने की कोशिश में है और देश का नागरिक ये खेल देखने को विवश है बहरहाल ये तो हुई राजनीति की बात मगर इससे इतर बात करें तो आज का दिन 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस देशवासियों के लिए बेहद अहम् और उनके स्वाभिमान का भी दिन है, जो भारतीय संविधान के लागू होने और भारत को एक संपूर्ण गणराज्य घोषित करने की याद दिलाता है। यह दिन न केवल हमारे राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है, बल्कि यह हमें हमारे संविधान और लोकतंत्र की ताकत की भी याद दिलाता है।आइए इस दिन को एक बार फिर याद करें ……..
भारतीय गणतंत्र की स्थापना
15 अगस्त 1947 को भारत ने स्वतंत्रता प्राप्त की, लेकिन उस समय देश का अपना संविधान नहीं था। भारत ब्रिटिश शासन से आज़ाद हुआ, लेकिन प्रशासन भारतीय सरकार अधिनियम 1935 के तहत चलाया जा रहा था। भारतीय संविधान सभा ने 29 अगस्त 1947 को डॉ. भीमराव अंबेडकर की अध्यक्षता में एक मसौदा समिति का गठन किया। इस समिति ने 2 साल, 11 महीने और 18 दिनों की मेहनत के बाद भारतीय संविधान तैयार किया। 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा ने इसे अपनाया, और यह 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ।
26 जनवरी का चुनाव एक ऐतिहासिक महत्व रखता है। 1930 में इसी दिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज की घोषणा की थी। इसलिए इस दिन को गणतंत्र दिवस के रूप में चुना गया।
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