भारत के प्रसिद्ध फोटोग्राफर रघु राय का रविवार तड़के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वे 83 वर्ष के थे। उनके निधन से कला और फोटोग्राफी जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। रघु राय ने अपनी अद्भुत दृष्टि और कैमरे के जरिए भारत के विविध रंगों, संस्कृति और जीवन के अनगिनत पहलुओं को पूरी दुनिया के सामने जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।
रघु राय पिछले कुछ समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। साथ ही उम्र से जुड़ी अन्य समस्याएं भी बढ़ गई थीं।
👉 यह भी पढ़ें:
- भारतीय यात्रियों के लिए बड़ी खबर, अबू धाबी में तीन महीने तक मुफ्त प्रवेश वीजा की पेशकश; जानिए किसे मिलेगा लाभ
- Indian Hockey Saffron Jersey : टीम इंडिया की भगवा जर्सी पर बवाल, प्रियंका से लेकर कई नेताओं ने साधा निशाना
- Iran Supreme Leader Ali Khamenei Funeral: तेहरान पहुंचे भारत के प्रतिनिधि, अली खामेनेई को दी श्रद्धांजलि, दुनिया की निगाहें ईरान पर
- Indian Shooting Legend Jaspal Rana Passes Away: 49 की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा, मनु भाकर के कोच के निधन से खेल जगत में शोक की लहर
- Immigration Rules 2025: भारत सरकार ने बदले विदेशी नागरिकों के नियम! वीजा, रजिस्ट्रेशन और नागरिकता से जुड़े बड़े बदलाव लागू
- मॉस्को पर यूक्रेन का भीषण मानवरहित हमला, भारतीय नागरिक समेत तीन की मौत
रघु राय के निधन की जानकारी उनके आधिकारिक सामाजिक मंच के माध्यम से साझा की गई। इस सूचना में यह भी बताया गया कि उनका अंतिम संस्कार आज रविवार, 26 अप्रैल को शाम चार बजे लोधी रोड पर किया जाएगा।
रघु राय का जन्म वर्ष 1942 में पंजाब के झंग में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में स्थित है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1965 में द स्टेट्समैन अखबार से फोटो पत्रकार के रूप में की। इसके बाद 1982 में उन्होंने इंडिया टुडे में लगभग दस वर्षों तक फोटो संपादक के रूप में काम किया।
उनकी फोटोग्राफी पर आधारित कई चर्चित पुस्तकें प्रकाशित हुईं, जिनमें रघु रायज डेल्ही, द सिख्स, कलकत्ता, ताजमहल, खजुराहो और मदर टेरेसा प्रमुख हैं। उनकी कृतियों में भारत की आत्मा और समाज की गहराई साफ झलकती है।
रघु राय को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनेक सम्मान प्राप्त हुए। वर्ष 1971 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया था। इसके अलावा वे प्रतिष्ठित मैग्नम फोटो से जुड़ने वाले पहले भारतीय फोटोग्राफर बने, जो उनकी वैश्विक पहचान का बड़ा प्रमाण है।
उनका निधन भारतीय कला जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है, लेकिन उनकी तस्वीरें और रचनाएं आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेंगी।



