👉 यह भी पढ़ें:
- गोलू भिया सावन आ रहा है, लोग कह रहे हैं-भले ही सड़कें जाम कर देना, लेकिन होर्डिंग से शहर को बदरंग मत करना
- प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के भाई नाना से साढ़े तीन घंटे फिर पूछताछ, ड्रग मामले में पुलिस ने बुलाया था
- प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के भाई नाना को पुलिस ने उठाया, ड्रग नेटवर्क में नाम आने के बाद हो रही पूछताछ
- Raja Raghuvanshi Murder Case : सुप्रीम कोर्ट में सोनम ने खुद को निर्दोष बताया, अब 14 जुलाई को होगी सुनवाई
- एक साल से फरार सहकारिता विभाग के सहायक आयुक्त बिलोदिया के प्रमोशन की तैयारी, पदोन्नति अधिनियम का हो रहा खुला उल्लंघन
- डायमंड गृह निर्माण संस्था की जमीन को लेकर अब सहकारिता विभाग की जादूगरी शुरू, सेठिया और कूचनकर जमा रहे सारा खेल
0:00 left
सोमवार को रानीपुरा में एक बहुत ही दुखद घटना हुई। वह भी रात को। वह भी ऐसे समय जब शहर में नवरात्रि के पहले दिन के गरबे की शुरुआत हो रही थी। पुलिस-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर कांस्टेबल तक उसके इंतजाम में लगे थे। शहर की जनता भी गरबा पंडालों में मां की आराधना में व्यस्त थी। ऐसे समय रानीपुरा में एक तीन मंजिला इमारत गिर गई और उसके मलबे में 13 जिंदगियां मौत से संघर्ष कर रही थीं।
इमारत क्यों गिरी, इसकी जांच-पड़ताल जारी है। चर्चाएं भी हैं, इसमें सबसे ज्यादा इसके बेसमेंट में पानी भरे होने यानी नींव कमजोर होने की बात कही जा रही है। भले ही इस मकान की नींव कमजोर रही होगी, लेकिन कल देर रात तक रानीपुरा में जो नजारा दिखा वह साफ संदेश दे रहा है कि हमारी एकता की नींव बहुत मजबूत है। कहने को तो यह इलाका मुस्लिम बहुल है, बिल्डिंग में भी मुस्लिम समाज के ही लोग रहते थे, लेकिन कल वहां मलबे में दबे लोगों को निकालने की कोशिश करने वालों में सिर्फ मानवता का ही चेहरा दिखा। कौन हिंदू, कौन मुसलमान भला कोई पहचान सकता था।
पहले मशीनों से बचाव कार्य की कोशिश की गई, लेकिन इससे बात नहीं बनी। फिर बचाव दल के सदस्यों के साथ लोग भी हथौड़े आदि लेकर जुट गए। लोगों ने दुकानें खुलवाकर गैस कटर, सब्बल आदि के इंतजाम किए। अधिकारियों, बचाव दल के कर्मचारियों तथा आम लोगों की हिम्मत के कारण ही 11 लोग जिन्दा निकाले जा सके।
एक बात और पांच घंटे से ज्यादा देर तक चले इस रेस्क्यू ऑपरेशन में कलेक्टर शिवम वर्मा सहित सारे अधिकारियों का मोर्चा संभाले रहना, एक टीम वर्क का संदेश भी दे रहा है। इसकी कमी लंबे समय से शहर में महसूस की जा रही थी।
कल की घटना ने यह साबित कर दिया कि अपना इंदौर ऐसा ही है। हम एक-दूसरे के सुख-दुख को समझते हैं और सहभागी भी बनते हैं। इंदौर के लोग सिर्फ तमाशबीन नहीं हैं।
सलाम है-शहर के इस जज्बो को…आगे भी यही जज्बा बनाए रखिए।



