मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई से पहले मौसम ने फिर से करवट ली है। प्रदेश के कई जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, जिससे निवासियों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। इस बदलाव के पीछे उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश और उत्तर छत्तीसगढ़ पर बने डिप्रेशन सिस्टम का सक्रिय होना प्रमुख कारण है।
बारिश का नया सिस्टम सक्रिय होने से मौसम में बदलाव
सितंबर के अंतिम सप्ताह में मानसून की विदाई से ठीक पहले सक्रिय हुआ डिप्रेशन सिस्टम प्रदेश के मौसम में बड़ा बदलाव लेकर आया है। इस सिस्टम के चलते न केवल कई जिलों में तेज बारिश हुई है, बल्कि कई स्थानों पर भारी जलभराव की स्थिति भी बनी है। इस दौरान दतिया, जबलपुर और आसपास के क्षेत्रों में बारिश की तीव्रता देखी गई।
👉 यह भी पढ़ें:
- मध्य प्रदेश में एक्सप्रेसवे नेटवर्क का विस्तार, भोपाल से दिल्ली-आगरा होगी तेज कनेक्टिविटी
- MP Weather Update: 27 से 29 सितंबर तक मध्य प्रदेश में बारिश और आंधी का अलर्ट
- मंडला में गणेश पंडाल में करंट लगने से 4 युवकों की मौत, कई घायल
- महू-खंडवा रेल ट्रैक पर 1.34 लाख पेड़ काटने का काम अक्टूबर से शुरू
- मध्य प्रदेश में 7 शहरों में 351 बसों की सुगम परिवहन सेवा शुरू, CM मोहन यादव और नितिन गडकरी ने हरी झंडी दिखाई
- इंदौर हाईकोर्ट ने लाउडस्पीकर की तेज आवाज पर सख्त कार्रवाई का आदेश
मौसम विभाग ने इस नए सिस्टम को लेकर सतर्कता बरती है और संभावित भारी बारिश के मद्देनजर कई जिलों में अलर्ट जारी किया है। इस प्रकार का मौसम बदलाव मानसून की विदाई से पहले सामान्य माना जाता है, लेकिन इस बार बारिश का दौर तेज होने के कारण प्रशासन ने भी सावधानी बरतने के आदेश दिए हैं।

कई जिलों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी
मौसम विभाग ने मध्य प्रदेश के 13 जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जिनमें दतिया, जबलपुर, सतना, बालाघाट जैसे जिले शामिल हैं। इसके अलावा 24 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। ऐसे में इन जिलों के निवासियों को बारिश और तूफानी हवाओं से सावधान रहने की हिदायत दी गई है।
अधिक बारिश के कारण सतना और मैहर में स्कूलों को बंद करने का निर्णय लिया गया है। प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए सतना जिले में कक्षा आठवीं तक और मैहर में कक्षा बारहवीं तक के स्कूलों में छुट्टी घोषित की है।
बरगी बांध का जलस्तर बढ़ने से पांच गेट खोले गए
लगातार हो रही बारिश के कारण जबलपुर के प्रसिद्ध बरगी बांध का जलस्तर काफी बढ़ गया है। सुरक्षा के लिहाज से बांध के पांच गेट खोलने पड़े हैं ताकि पानी की अधिकता को नियंत्रित किया जा सके। यह कदम बांध के आसपास के इलाकों में बाढ़ की स्थिति से बचाव के लिए आवश्यक था।
बरगी बांध का जलस्तर बढ़ना न केवल स्थानीय जलसंकट को कम करता है बल्कि सिंचाई के लिए भी सहायक होता है। हालांकि, अधिक जलस्तर के कारण जल निकासी का प्रबंध करना प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।

मानसून की विदाई से पहले अब तक की कुल बारिश का आंकड़ा
मध्य प्रदेश में इस मानसून सीजन में अब तक 37.7 इंच बारिश दर्ज की गई है, जो कि राज्य के सामान्य कोटे का 95.8% है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि मानसून ने अधिकांश हिस्सों में अपने सामान्य स्तर के करीब बारिश की है।
राज्य को सामान्य वर्षा का कोटा पूरा करने के लिए मात्र 0.2% और बारिश की आवश्यकता है। ऐसे में मानसून की विदाई के साथ ही बारिश की गति धीमी होने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार अगले एक सप्ताह में मानसून पूरी तरह से विदा हो सकता है।
मंडला और पन्ना में सर्वाधिक बारिश दर्ज
बीते 24 घंटों में मंडला जिले के बिछिया में सबसे अधिक 191.8 मिमी (लगभग 8 इंच) बारिश रिकॉर्ड की गई। वहीं, पन्ना जिले के अजयगढ़ में भी 180.2 मिमी बारिश हुई, जो कि भारी वर्षा का संकेत है।
यह बारिश भारी जलभराव और नदियों के जलस्तर बढ़ने का कारण बनी है। मंडला जिले में नर्मदा नदी का पानी रिहायशी क्षेत्रों तक पहुंच गया था, जिससे स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहना पड़ा। हालांकि बारिश के कमजोर पड़ने के बाद स्थिति में सुधार हुआ है।
मौसम में सुधार के साथ मानसून की विदाई की तैयारी
मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार, 28 सितंबर तक सक्रिय बारिश प्रणाली कमजोर हो गई है। अगले चार दिनों तक प्रदेश में भारी बारिश की संभावना नहीं है। मंगलवार से इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर-चंबल संभागों में तेज धूप खिलने के आसार हैं।
इस बदलाव के साथ मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। आने वाले दिनों में मौसम शुष्क और साफ रहेगा, जिससे किसानों और आम जनता को राहत मिलेगी। हालांकि, अभी भी कुछ इलाकों में बारिश की बची हुई संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।



