महापौरजी, शहर के लोग पूछ रहे हैं सवाल…हर कमिश्नर के साथ आपका क्यों हो जाता है बवाल?

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भंवरकुआं थाने में शनिवार रात को जो कुछ भी हुआ, उसको लेकर लोगों के मन में कई तरह के सवाल हैं। लोग यह नहीं समझ पा रहे कि इंदौर के शांत तालाब में आखिर किसने कंकड़ मारा? कौन है जो इंदौर का माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहा है?

सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि महापौर की किसी भी निगमायुक्त से क्यों नहीं बनती? चाहे वह हर्षिका सिंह हों या शिवम वर्मा हों या फिर अब दिलीप कुमार यादव। शिवम वर्मा की तो आपने सीएम से भी कई बार शिकायत की, लेकिन उन्हें इंदौर का कलेक्टर ही बना दिया गया।

महापौरजी, आपको पता ही होगा कि दिलीप कुमार यादव की नियुक्ति भी सीएम की सहमति से ही हुई है, फिर इनके साथ भी आपका तालमेल कैसे गड़बड़ा गया? आखिर आप दोनों के बीच ऐसा क्या चल रहा है कि इंदौर की जनता त्रस्त हो रही है।

लोग तो यह भी कह रहे हैं कि कुछ समय पहले तक आप जिस मंत्रीजी के करीब थे, उनका असर आप पर पड़ने लगा है। उस मंत्रीजी की भी फितरत ऐसी रही है कि न तो किसी सीएम से बनी और न ही किसी अफसर से। कहीं ऐसा तो नहीं कि वही मंत्रीजी आपको भी कुछ सुझाव दे रहे हों।

भाजपा वाले तो डॉ.उमाशशि शर्मा, कृष्णमुरारी मोघे और मालिनी गौड़ के कार्यकाल को भी याद कर रहे हैं। एक और खास बात मनीष सिंह जैसे कड़क मिजाज अफसर से भी कभी मालिनी गौड़ की नहीं बिगड़ी। यही वजह रहा कि शहर कोरोना जैसी महामारी से जूझ पाया और सफाई में भी नंबर वन आया। मालिनी गौड़ ने कभी किसी कमिश्नर की भोपाल तक शिकायत नहीं पहुंचाई और न ही किसी अफसर ने उनकी बात टालने की कोशिश की फिर आपके साथ ही ऐसा क्यों हो रहा है?

महापौरजी, नए निगमायुक्त के खिलाफ भाजपा नेताओं से माहौल बनवाने या सोशल मीडिया पर उनके समाजवादी पार्टी से जुड़े होने की बात कहलवाने से कुछ नहीं होने वाला?

आज यादव कमिश्नर हैं, उनसे पहले भी कोई था, कल कोई और आएगा लेकिन हर अफसर से आपकी नहीं बनना बड़े सवाल खड़े कर रहा है?

एक बार सोचिएगा जरूर…शहर हित में…भाजपा के हित में और हो सके तो अपने हित में भी।

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