मध्यप्रदेश पुलिस के मुखिया मकवाना साहब ने तो सारे घर के ही बदल डाले, सबसे ज्यादा ‘मेहरबानी’ सीएम के प्रभार वाले जिले इंदौर पर

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भोपाल। मध्यप्रदेश पुलिस में तबादले को लेकर डीजीपी कैलाश मकवाना के आदेश का पालन हो गया है। लंबे समय से प्रदेश के विभिन्न थानों में जमे 10482 सिपाही से लेकर सब इंस्पेक्टर तक के तबादले के आदेश जारी हो चुके हैं। इसमें मुख्यमंत्री के प्रभार वाले जिले इंदौर पर सबसे ज्यादा मेहरबानी दिखाई गई है। यहां सबसे ज्यादा 1029 पुलिसकर्मियों के ट्रांसफर हुए हैं।

उल्लेखनीय है कि कानून-व्यवस्था में चुस्ती लाने के लिए सीएम डॉ.मोहन यादव के आदेश पर डीजीपी कैलाश मकवाना ने यह ऑपरेशन किया है। 11 जून को पुलिस हेडक्वार्टर से पूरे प्रदेश को आदेश जारी हुआ था कि 4 साल से अधिक समय से एक ही स्थान पर जमे पुलिसकर्मियों के तबादले किए जाएं। यह प्रक्रिया 16 जून तक पूरी करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद तबादले की प्रक्रिया शुरू हुई। इसमें हवलदार, एएसआई, एसआई और सिपाही को शामिल किया गया। अब तक टॉप में इंदौर ही है। यहां से 1029 पुलिसकर्मियों के ट्रांसफर हुए हैं। इसके बाद ग्वालियर से 828, भोपाल से 699, जबलपुर से 535 और नर्मदापुरम से 372 पुलिसकर्मियों के ट्रांसफर किए गए हैं। अन्य जिलों से भी काफी संख्या में ट्रांसफर हुए हैं।

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नए आदेश में दागियों पर नजर

थोकबंद तबादले के बाद अब मध्यप्रदेश पुलिस के विशेष महानिदेशक (प्रशासन) आदर्श कटियार ने एक नया आदेश जारी कर दागी पुलिसकर्मियों को थाने की ड्यूटी से बाहर रखने को कहा है। इसके तहत ऐसे पुलिसकर्मी की पोस्टिंग नहीं की जाएगी, जिन पर भ्रष्टाचार, नैतिक गिरावट, मारपीट या अवैध गतिविधियों में संलिप्त रहने के आरोप हैं। जिन पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपराधिक मामलों में जांच चल रही है या फिर जिन पर कोर्ट केस चल रहा है, वे पुलिसकर्मी भी थानों की पोस्टिंग से वंचित रहेंगे।

अब निरंतर निगरानी रखने की जरूरत

मध्यप्रदेश पुलिस में तबादलों की यह कवायद सराहनीय है, क्योंकि लगभग पूरे प्रदेश से ही थानों के पुलिसकर्मियों की शिकायत आ रही थी। जनता त्रस्त थी। अगर सही में जनता को राहत दिलानी है तो अब निरंतर निगरानी रखने की जरूरत है। माना कि अभी अंगद के पांव की तरह जमे पुलिसकर्मी थानों से हट गए हैं, लेकिन आगे अगर अगर निगरानी और समीक्षा नहीं हुई तो फिर से यही पुलिसकर्मी अंगद बन जाएंगे।

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