इसे मामूली तस्वीर मत समझिए, यह इंदौर की राजनीतिक बिसात है, इसमें कई चेहरे खेल रहे हैं शह और मात का खेल

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भोपाल। इंदौर सफाई में लगातार आठवीं बार नंबर वन तो आ गया, लेकिन इस बार राजनीति भी नंबर वन हो रही है। अवॉर्ड मिलने वाले दिन शाम को मध्यप्रदेश के सर्वशक्तिमान मंत्री इंदौर पहुंचे और एयरपोर्ट पर हार-फूल पहन कर अपने समर्थकों से जश्न मनवा लिया। इस जश्न में इंदौर को सफाई में नंबर वन लाने वाला कोई नहीं था।

अब कहानी थोड़ी आगे बढ़ती है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव को अगले दिन इंदौर आना था। जब महापौर को पता चला कि सारी महफिल मंत्रीजी लूट ले गए हैं, तब उनका माथा ठनका। महापौर ने सोचा सारी मेहनत नगर निगम की और जिसका सफाई से कोई लेना-देना नहीं वह हीरो बना फिर रहा है। फिर क्या था, महापौर ने भी पूरी ताकत लगा दी। इसका परिणाम यह हुआ जब अवॉर्ड के साथ महापौर इंदौर पहुंचे तो जोरदार स्वागत हुआ। माहौल ऐसा बना कि मंत्रीजी का जश्न पीछे रह गया।

सीएम के विदेश दौरे से बिगड़ा संतुलन

यह सब जब हुआ तो सीएम विदेश दौरे पर थे। अगर भारत में होते तो शायद अवॉर्ड लेने भी पहुंच जाते। दिल्ली नहीं भी जाते तो इंदौर आ ही जाते। ऐसे में मंत्रीजी को झांकीबाजी का मौका नहीं मिलता और महापौर को भी उचित सम्मान मिल जाता। और तब राजनीतिक के संतुलन का पलड़ा भी नहीं डोलता।

सीएम के आते ही की जमावट

महापौर पुष्यमित्र भार्गव काफी हद तक अपनी रणनीति में सफल रहे, लेकिन अब सीएम के साथ झांकी बाकी थी। सीएम के भोपाल आते ही महापौर ने जमावट शुरू की, लेकिन तब भी यह डर बना हुआ था कि मंच कोई और न लूट ले जाए। इसीलिए मंत्री तुलसी सिलावट और भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा को इस मिशन में शामिल किया। इसके बाद नगर निगम कमिश्नर शिवम वर्मा, अपर आयुक्त अभिलाष मिश्रा आदि इस मिशन के हिस्सा बने। फिर सामने आई सीएम के साथ अवॉर्ड लिए विजयी मुस्कान वाली तस्वीर।

अब क्या आगे भी यही होगा क्या

स्वच्छता अवॉर्ड के बहाने ही सही इंदौर की एकतरफा शांत पड़ी राजनीति में किसी ने एक पत्थर तो मार ही दिया है। यह बात सामने वाला तो नहीं ही समझेगा, लेकिन अगर ऐसे ही और पत्थर उछाले जाते रहे तो हलचल मची रहेगी। इंदौर भाजपा के लोग महापौर की इस बात के लिए तारीफ कर रहे हैं कि उन्होंने एक कोशिश तो जरूर की। भले ही इसे श्रेय लेने की राजनीति कहें या अपने अधिकार के लिए लड़ने की कोशिश।

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