भोपाल। बिहार के बांकीपुर के बाद मध्यप्रदेश के दतिया में हुए उपचुनाव में भी भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है। यहां पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटना दतिया के लोगों को रास नहीं आया और उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी को अपना समर्थन दे दिया। इस चुनाव में हार के बाद भाजपा आलाकमान को भी अपने जबरदस्ती थोपे गए फैसलों पर सोचना होगा।
कांग्रेस ने भाजपा को 6065 वोटों से हराया
दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस ने लगातार दूसरी बार भाजपा को हरा दिया। कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने भाजपा के आशुतोष तिवारी को 6056 वोटों से हराया। पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के पोलिंग बूथ नंबर 121 पर भी भाजपा हार गई, जहां कांग्रेस को 291 और भाजपा को 264 वोट मिले।
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टिकट कटने पर हो गई थी बगावत
उल्लेखनीय है कि जब भाजपा ने यहां से पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटा था तो पार्टी में बगावत हो गई थी। भाजपा जिला अध्यक्ष सहित कई नेताओं ने इस्तीफा दे दिया था तथा मिश्रा समर्थक सड़कों पर उतर आए थे। दतिया में रात भर जमकर हंगामा चला। इसके बाद मिश्रा सीएम मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से मिले लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। फिर वे दिल्ली तक भी पहुंचे, लेकिन किसी वरिष्ठ नेता से मुलाकात नहीं हो पाई।
प्रचार के दौरान मिश्रा की आंखों से निकले थे आंसू
बाद में पार्टी ने जैसे-तैसे नरोत्तम मिश्रा को मनाया और उन्होंने अपने समर्थकों से विरोध का रास्ता छोड़ने को कहा। इसके बाद जब मिश्रा को भाजपा उम्मीदवार के नामांकन में ले जाया गया तो सीएम मोहन यादव के सामने खुले मंच पर उनकी आंखों से आंसू निकले। चुनाव प्रचार के दौरान भी मिश्रा के दिल का दर्द कई बार छलक कर बाहर आया।
क्या फेल हो गया मोदी फॉर्मूला
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार कर युवा नितीन नवीन को जब बिठाया गया, तब से यह चर्चा आम थी कि पार्टी में अब 70 पार नेताओं को किनारे कर दिया जाएगा। भाजपा के सूत्र भी बताते हैं कि इसी मोदी फॉर्मूले के तहत नरोत्तम मिश्रा का टिकट भी काटा गया था। दतिया में भाजपा की हार के बाद इस फॉर्मूले पर नए सिरे से विचार करने की जरूरत होगी।
हार के बाद क्या होगा पार्टी का रिएक्शन
अब यह देखना भी दिलचस्प होगा कि दतिया में हार के बाद संगठन का क्या रिएक्शन होता है। क्या नरोत्तम मिश्रा और उनके समर्थकों पर कार्रवाई होगी? सबसे बड़ी बात यह है कि दतिया उपचुनाव में भाजपा के सारे नेताओं ने पूरे समय मैदान संभाले रखा था। ऐसे में अब इस बात पर भी विचार करना होगा कि क्या टिकट वितरण का फैसला गलत हुआ या फिर नरोत्तम मिश्रा की जमीन बिल्कुल ही खोखली हो गई थी।
मिश्रा जैसे नेता भाजपा के लिए चुनौती
भाजपा के लिए आने वाले दिनों में नरोत्तम मिश्रा जैसे नेता एक बड़ी चुनौती बनते नजर आएंगे। यह तो मिश्रा को भी पता है कि उनका टिकट कैसे कटा? भ्रष्टाचार के आरोप और क्षेत्र से आ रही लगातार शिकायतों तथा पिछली बार की हार इसके प्रमुख कारण रहे। इसके बाद भी मिश्रा दादागिरी दिखाते रहे। वरिष्ठ नेताओं के समझाने के बाद वे भले ही भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार करते नजर आए, लेकिन उनके समर्थक क्या कर रहे थे, यह किस से छुपा नहीं। अब भाजपा को ऐसे नेताओं से निपटने की रणनीति भी बनानी होगी, क्योंकि अगले चुनाव में फिर से नरोत्तम मिश्रा उम्मीद से रहेंगे।



