मंडला में लोकायुक्त की टीम ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) गजानन नाफड़े को 2 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई 25 सितंबर 2026 को मंडला नगर पालिका कार्यालय में हुई। लोकायुक्त की इस कार्रवाई से मंडला में भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा संदेश गया है।
सीएमओ गजानन नाफड़े से रिश्वत लेने की घटना
मंडला में मुख्य नगर पालिका अधिकारी गजानन नाफड़े ने ठेकेदार ज्ञानचंद बेन से 15 लाख रुपये के लंबित बिल का भुगतान कराने के एवज में कुल 4 लाख रुपये रिश्वत की मांग की थी। लोकायुक्त जबलपुर की टीम ने शिकायत की जांच के बाद 2 लाख रुपये की पहली किस्त लेते हुए उन्हें गिरफ्तार किया। यह राशि नकद रूप में थी और गिरफ्तारी नगर पालिका कार्यालय के सीएमओ कक्ष में हुई।
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शिकायतकर्ता और लंबित भुगतान का मामला
शिकायतकर्ता ज्ञानचंद बेन जबलपुर के निवासी हैं और उनकी पत्नी मंजू बेन की फर्म ‘एमएस पलक बेन’ को मंडला नगर पालिका से एलईडी लाइट और फिटकरी की आपूर्ति का ठेका मिला था। ठेकेदार का करीब 15 लाख रुपये का बिल पाइप जॉइंट, वाटर कूलर सप्लाई और नल-जल योजना से जुड़े कार्यों का लंबित था। इस भुगतान को पास कराने के लिए सीएमओ ने रिश्वत मांगी थी।
लोकायुक्त की टीम और कार्रवाई का विस्तार
यह कार्रवाई लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक अंजुलता पटले की निगरानी में जबलपुर लोकायुक्त की टीम ने की। शिकायत मिलने के बाद टीम ने मामले की जांच की और रिश्वत की पुष्टि पर जाल बिछाकर ट्रैप की योजना बनाई। ठेकेदार को पहली किस्त के रूप में 2 लाख रुपये सीएमओ को देने भेजा गया, जहां लोकायुक्त की टीम ने उन्हें गिरफ्तार किया।

मंडला नगर पालिका कार्यालय में हड़कंप
सीएमओ गजानन नाफड़े के रंगे हाथों गिरफ्तार होने से मंडला नगर पालिका कार्यालय में हड़कंप मच गया। लोकायुक्त ने गिरफ्तारी के बाद अधिकारी को सर्किट हाउस ले जाकर आगे की कार्रवाई शुरू की। इस कार्रवाई से नगर पालिका में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती का संदेश गया है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त की भूमिका
मंडला में लोकायुक्त की यह कार्रवाई प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ जागरूकता और कठोर कदमों का उदाहरण है। लोकायुक्त का उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों में ईमानदारी और पारदर्शिता बढ़ाना है। इससे आम जनता को बेहतर सेवा मिलने की उम्मीद है।
आगे की संभावित कार्रवाई और प्रभाव
गजानन नाफड़े के खिलाफ लोकायुक्त आगे जांच करेगा और दोषी पाए जाने पर कड़ी सजा की कार्रवाई की संभावना है। यह घटना प्रशासन में पारदर्शिता की मांग को मजबूत करेगी और अन्य अधिकारियों के लिए चेतावनी भी। आम जनता के लिए यह भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।



