जमुई पीड़िता की तस्वीर पर चर्चा ने बिहार की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। 24 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा सोशल मीडिया पर नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने वाली तस्वीर पोस्ट करने के बाद विपक्ष ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। तेजस्वी यादव ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है, जिससे यह मुद्दा और भी गरमाया है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पीड़िता के परिवार से की मुलाकात
24 सितंबर को पटना स्थित मुख्यमंत्री के आवास पर सम्राट चौधरी ने जमुई जिले की पीड़िता और उसके परिजनों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने परिवार को स्पीडी ट्रायल के जरिए एक महीने के भीतर आरोपियों को सजा दिलाने का आश्वासन दिया। हालांकि, विवाद तब बढ़ा जब इस मुलाकात की तस्वीर में नाबालिग की पहचान उजागर हो गई।
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सोशल मीडिया पर तस्वीर पोस्ट करने से बढ़ा विवाद
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपनी आधिकारिक X (पूर्व ट्विटर) हैंडल पर मुलाकात की तस्वीर पोस्ट की, जिसमें पीड़िता की पहचान स्पष्ट थी। बाद में बढ़ते विवाद को देखते हुए यह पोस्ट हटा दी गई। इस कदम को लेकर विपक्ष ने मुख्यमंत्री पर पॉक्सो एक्ट की अवहेलना का आरोप लगाया है।
तेजस्वी यादव ने FIR दर्ज करने की मांग की
राजद नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री की डिलीट की गई पोस्ट का स्क्रीनशॉट साझा किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने नाबालिग की पहचान उजागर कर पॉक्सो एक्ट, 2012 की धारा 23 का उल्लंघन किया है। इसके तहत तत्काल FIR दर्ज करने की मांग की गई है ताकि न्याय सुनिश्चित हो सके।
मीसा भारती ने पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल
राजद सांसद मीसा भारती ने भी वही स्क्रीनशॉट साझा करते हुए बिहार पुलिस पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि जिन लोगों ने छेड़छाड़ का वीडियो सोशल मीडिया पर डाला, उनकी कार्रवाई हो रही है, लेकिन मुख्यमंत्री के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। यह सवाल पुलिस की निष्पक्षता पर भी तंज कसा है।
बिहार पुलिस की पूर्व कार्रवाई और अब की स्थिति
तेजस्वी यादव के अनुसार, पीड़िता की निजता का उल्लंघन करने वाले लगभग 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल पर पहले ही पुलिस ने कार्रवाई की है। बावजूद इसके, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के खिलाफ FIR दर्ज नहीं हुई है। विपक्ष ने पुलिस प्रशासन से बिना किसी राजनीतिक दबाव के निष्पक्ष जांच की मांग की है।
राजद का कोर्ट जाने का ऐलान
राजद ने साफ किया है कि यदि पुलिस प्रशासन जल्द FIR दर्ज कर कार्रवाई नहीं करता है, तो वे माननीय न्यायालय का रुख करेंगे। उनका यह कदम कानून के प्रति सम्मान और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने की कोशिश है। इस मामले में आगे की कानूनी लड़ाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।



