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इंदौर के एक बड़बोले मंत्रीजी हैं, पता नहीं कब से सीएम इन वेटिंग हैं। जो भी सीएम आता है, उससे उनकी नहीं बनती। इसीलिए बार-बार रायता ढोलने की कोशिश करते हैं। जरा उनकी ही विधानसभा की हालत देख लीजिए। अगर मंत्रीजी का अपने क्षेत्र पर ध्यान होता तो कल भगीरथपुरा के डेढ़ सौ से ज्यादा लोग दूषित पानी से बीमार नहीं होते।
खास बात यह कि मंत्रीजी नगरीय प्रशासन मंत्री हैं। नगर निगम के महापौर उनके इशारे पर चलते हैं। अधिकांश पार्षद और एमआईसी सदस्य उनके पट्ठे हैं। इसके बाद भी मंत्रीजी की विधानसभा में दूषित पानी की सप्लाई समझ से परे है।
जब भी सीएम इंदौर आते हैं तो मंत्रीजी अधिकारियों की शिकायत करते रहते हैं। मंत्रीजी का कहना है कि अधिकारी उनकी नहीं सुनते। जब भी वे टांग फंसाने जाते हैं तो अधिकारी इंदौर जिले का प्रभार सीएम के पास होने का हवाला देते हैं। लेकिन, मंत्रीजी कम से कम अपने विभाग पर तो पकड़ बनाकर रखिए।
भाजपा के नेता और सरकारी अफसरों का कहना है कि मंत्रीजी तो सीएम के सामने घड़ियाली आंसू बहाते रहते हैं। आए दिन अफसरों को चमकाना और दूसरे विधानसभा क्षेत्रों में भी दखल देना मंत्रीजी की फितरत में शामिल है। शहर का कोई ऐसा अफसर नहीं जो मंत्रीजी की बात टाल दे, फिर ऐसी स्थिति क्यों बन रही है।
मंत्रीजी की विधानसभा के भगीरथपुरा में जो कुछ हुआ, उससे क्या यह मान लें कि मंत्रीजी अफसर बिल्कुल ही नहीं सुनते या फिर इसका यह अर्थ लगाया जाए कि मंत्रीजी का अपने क्षेत्र पर ध्यान ही नहीं है।
मंत्रीजी, भाजपा के लोग और इंदौर की जनता ही यह कह रही है कि आप अपने क्षेत्र पर ध्यान देने की बजाए दूसरे ऐसे कामों में उलझे रहते हैं, जिससे आपका कोई लेनादेना नहीं। आपको सार्वजनिक मंच से लेकर विधानसभा तक अपने ही नेताओं की खिल्ली उड़ाने से ही फुर्सत नहीं है।
माना कि आप सीएम नहीं बन पाए। यह भी माना कि सीएम से आपकी नहीं बनती। यह भी मान सकते हैं कि अफसर आपकी नहीं सुनते, लेकिन यह तो नहीं मान सकते कि आपके रहते हुए इंदौर नगर निगम आपके ही क्षेत्र के लोगों को दूषित पानी पिला दे।



