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नई दिल्ली। मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाने के खिलाफ पूरे देश में आंदोलन करेगी। दिल्ली में शनिवार को हुई कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में यह फैसला लिया गया। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को खत्म किए जाने के खिलाफ देशव्यापी अभियान की जरूरत है।
बैठक में खड़गे ने कहा कि यह लोकतंत्र, संविधान और नागरिक अधिकारों पर गंभीर संकट है। खड़गे ने मनरेगा को महात्मा गांधी के ‘सर्वोदय’ विचार के खिलाफ बताया है। बैठक में तय किया गया कि 5 जनवरी से मनरेगा बचाओ अभियान की शुरुआत की जाएगी। बैठक को संबोधित करते हुए खड़गे ने कहा कि मनरेगा यूपीए सरकार की एक दूरदर्शी योजना थी, जिसकी तारीफ पूरी दुनिया में हुई। इस योजना के प्रभाव के कारण ही इसका नाम महात्मा गांधी के नाम पर रखा गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने बिना किसी अध्ययन, मूल्यांकन या राज्यों और राजनीतिक दलों से परामर्श किए इस कानून को निरस्त कर दिया।
कृषि कानूनों जैसे विरोध की जरूरत
खड़गे ने 3 कृषि कानूनों का उदाहरण देते हुए कहा कि कैसे विरोध के बाद सरकार को उन्हें वापस लेना पड़ा था, आज ऐसे ही विरोध की जरूरत है। इस योजना ने ग्रामीण भारत का चेहरा बदला है। बैठक में खड़गे ने एसआईआर पर भी चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि यह लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित करने की एक सोची समझी साजिश है। बार–बार तथ्यों और उदाहरणों के साथ वोट चोरी का प्रमाण देश के सामने रखा है। भाजपा और चुनाव आयोग की मिलीभगत जगजाहिर है। इसलिए हमें सुनिश्चित करना होगा कि हमारे वोटरों के नाम न काटे जाएं।
सोनिया गांधी ने कही एकजुटता की बात
बैठक में सोनिया गांधी ने कहा कि मनरेगा को समाप्त करना, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का अपमान है। अब पहले से कहीं ज्यादा जरूरी है कि हम एकजुट हों और उन अधिकारों की रक्षा करें जो हम सभी की रक्षा करते हैं। मोदी सरकार को गरीबों की चिंता नहीं, बल्कि चंद बड़े पूंजीपतियों के मुनाफे की ही चिंता है।
दिग्विजय सिंह ने संगठन के केंद्रीकरण की कही बात
सीडब्ल्यूसी की बैठक में कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने संगठन के केंद्रीकरण का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि संगठन में विकेंद्रीकरण जरूरी है। इसके लिए प्रदेशों में अध्यक्ष तो बताया जाता है, लेकिन कमिटी का गठन नहीं किया जाता है।



