प्रशांत किशोर बोले: ‘लोगों का चुनाव आयोग से भरोसा उठा’

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प्रशांत किशोर ने हाल ही में चुनाव आयोग पर अपनी आलोचनात्मक टिप्पणी की, जिसमें उन्होंने कहा कि पिछले 8 से 10 वर्षों में लोगों का चुनाव आयोग से भरोसा उठ गया है। यह बयान उन्होंने CJP आंदोलन के संदर्भ में दिया, जो चुनाव आयोग की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर जारी है।

चुनाव आयोग के प्रति बढ़ता अविश्वास और CJP आंदोलन

प्रशांत किशोर ने स्पष्ट किया कि समाज के एक बड़े तबके का चुनाव आयोग के कामकाज पर भरोसा पिछले कई वर्षों से कमजोर होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस अविश्वास का प्रमुख कारण चुनाव आयोग की पारदर्शिता और निष्पक्षता में कमी है। इसके चलते CJP यानी सिटिज़न्स फॉर जस्टिस एंड पीस के बेंगलुरु और दिल्ली में हो रहे प्रदर्शनों का समर्थन बढ़ रहा है।

उन्होंने यह भी बताया कि जब तक चुनाव आयोग में व्यापक सुधार नहीं होंगे और वह जनता के प्रति जवाबदेह नहीं बनेगा, CJP आंदोलन और व्यापक रूप लेगा।

प्रशांत किशोर चुनाव आयोग भरोसा और CJP आंदोलन पर बयान देते हुए

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग

प्रशांत किशोर ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए और उनके इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि केवल एक व्यक्ति को हटाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि आयोग के समग्र सुधारों की आवश्यकता है।

उन्होंने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार का उदाहरण देते हुए कहा कि आयोग में पहले भी ऐसे रवैये देखे गए हैं, जिनके कारण उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद देश के सबसे बड़े निजी बैंक HDFC बैंक का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। यह दर्शाता है कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

मतदाता सूची और चुनाव तिथियों में पारदर्शिता की कमी

प्रशांत किशोर ने मतदाता सूची के निर्माण और संशोधन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने फॉर्म-6 और फॉर्म-7 में बदलावों तथा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान नाम हटाने की घटनाओं पर संदेह जताया।

उनका मानना है कि इन प्रक्रियाओं से मतदाता सूची की विश्वसनीयता प्रभावित हुई है, जिससे चुनाव आयोग और पूरे चुनावी तंत्र पर लोगों का भरोसा कम हुआ है। इसके साथ ही उन्होंने चुनाव तिथियों की घोषणा और आचार संहिता लागू करने के नियमों में भी सुधार की आवश्यकता बताई।

सुप्रीम कोर्ट की याचिका और चुनाव आयोग की जवाबदेही

अक्टूबर 2026 की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ दायर याचिका पर निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार से जवाब मांगा। यह याचिका चुनाव आयोग की निष्पक्षता और कार्यशैली को लेकर उठाई गई गंभीर चिंताओं का हिस्सा है।

प्रशांत किशोर ने इस मामले को चुनाव आयोग की जवाबदेही और पारदर्शिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में यह मुद्दा और अधिक गंभीरता से उठेगा।

बिहार में चुनावी प्रक्रिया पर प्रशांत किशोर की टिप्पणियां

प्रशांत किशोर ने बिहार में चुनावी प्रक्रिया को भी लेकर कई गंभीर बातें कहीं। उन्होंने कहा कि मतदान से ठीक पहले वोट खरीदने की घटनाएं हुईं, लेकिन चुनाव आयोग मूकदर्शक बना रहा। उन्होंने इस पर आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए।

इसके अलावा उन्होंने जदयू के प्रत्याशी नीरज कुमार पर भी तीखा हमला बोला और कहा कि वे अपनी औकात से ऊपर बोल रहे थे। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से चुनौती दी कि यदि वे नीरज कुमार के समर्थन में मीडिया के सामने आएं, तो वे अपना उम्मीदवार वापस ले लेंगे।

चुनाव आयोग में व्यापक चुनावी सुधारों की आवश्यकता

प्रशांत किशोर ने चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया, मतदाता सूची के निर्माण, चुनाव तिथियों की घोषणा और आचार संहिता लागू करने के नियमों में व्यापक सुधारों की मांग की।

उन्होंने कहा कि केवल एक व्यक्ति को हटाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। सुधारों के बिना चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना मुश्किल होगा। इसके बिना CJP जैसे आंदोलन और बढ़ेंगे।

Ardhendu Bhushan - Consulting Editor
Ardhendu Bhushan - Consulting Editorhttp://www.hbtvnews.com
Ardhendhu Bhushan is a senior consulting editor with extensive experience in the media industry. He is recognized for his sharp editorial insight and strategic guidance.

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