ट्रंप-जेलेंस्की मुलाकात: टोमहॉक मिसाइलों पर असमंजस, पुतिन की चेतावनी से बदला रुख
रूस और यूक्रेन के बीच जारी तीन साल पुराने संघर्ष के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी क्रम में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से मुलाकात की। हालांकि, जेलेंस्की की सबसे बड़ी उम्मीद — अमेरिका से लंबी दूरी की ‘टोमहॉक’ क्रूज मिसाइलें मिलने की — फिलहाल अधूरी ही लग रही है।
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यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री साइबिहा ने कहा कि “सिर्फ टोमहॉक मिसाइलों की चर्चा ने ही पुतिन को बातचीत पर आने के लिए मजबूर कर दिया। ताकत से ही शांति का रास्ता निकल सकता है।” उन्होंने यह भी बताया कि जेलेंस्की अब अमेरिका के आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए नई रणनीति लेकर आए हैं, जिसके तहत अमेरिकी कंपनियों को यूक्रेन की गैस भंडारण सुविधाओं में तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) स्टोर करने का प्रस्ताव दिया गया है। इससे अमेरिका की यूरोपीय ऊर्जा बाजार में उपस्थिति और मजबूत होगी।
ट्रंप ने कहा कि वह जल्द ही रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में मुलाकात करेंगे। इसके अलावा, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रूसी अधिकारियों के बीच भी अगले सप्ताह बैठक प्रस्तावित है।
ट्रंप ने स्वीकार किया कि जेलेंस्की और पुतिन के बीच सीधी वार्ता “बहुत कठिन” है। उन्होंने कहा, “दोनों के बीच तनाव गहरा है, शायद बातचीत अलग-अलग करनी पड़ेगी — अलग, लेकिन बराबरी के स्तर पर।”
हालांकि ट्रंप के टोमहॉक मिसाइलों पर बदले रुख के पीछे पुतिन की कड़ी चेतावनी को अहम कारण माना जा रहा है। ट्रंप ने बातचीत के बाद कहा, “हमारे पास बहुत सी टोमहॉक मिसाइलें हैं, लेकिन हमें अपनी जरूरतों के लिए भी उनकी आवश्यकता है। हम अपने देश को खाली नहीं कर सकते।”
ज्ञात हो कि टोमहॉक मिसाइलें लगभग 1,600 किलोमीटर तक की दूरी तक मार करने में सक्षम हैं। जेलेंस्की का मानना है कि इन मिसाइलों से यूक्रेन रूसी ठिकानों और महत्वपूर्ण इन्फ्रास्ट्रक्चर पर हमला कर सकेगा, जिससे पुतिन को शांति वार्ता के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
दूसरी ओर, पुतिन ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने यूक्रेन को ये मिसाइलें दीं, तो इससे अमेरिका-रूस संबंधों को गहरा नुकसान होगा।


