धनतेरस : दिवाली के पंचदिवसीय उत्सव का शुभारंभ, आज बन रहा है ब्रह्म योग और बुधादित्य योग का संयोग
आज कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि है, जिसे पूरे देश में धनतेरस के रूप में बड़े हर्ष और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इसी दिन से दिवाली के पंचदिवसीय उत्सव की शुरुआत होती है।
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पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी तिथि को समुद्र मंथन के दौरान आयुर्वेद के देवता भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसलिए यह दिन धन, स्वास्थ्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

धनतेरस पर शुभता और सौभाग्य की कामना के लिए लोग सोना, चांदी, वाहन और अन्य कीमती वस्तुएं खरीदते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन की गई खरीदारी कई गुना बढ़कर फल देती है।
आज बन रहा है ब्रह्म योग और बुधादित्य योग का संयोग
इस बार धनतेरस पर ब्रह्म योग और बुधादित्य योग का शुभ संयोग बन रहा है, जो आर्थिक प्रगति और भाग्यवृद्धि के लिए अत्यंत अनुकूल माना गया है।
शुभ मुहूर्त और पूजा का समय
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, खरीदारी का शुभ मुहूर्त सुबह 7:49 बजे से शुरू होकर दिनभर अलग-अलग चौघड़िया में शुभ रहेगा।
रात के समय चर काल (12:06 से 1:41 बजे) तक का समय विशेष रूप से लाभदायक माना गया है। इस दौरान सोना, चांदी, वाहन या अन्य कीमती वस्तुएं खरीदना शुभ फलदायक रहेगा।
धनतेरस के दिन पूजा का सर्वश्रेष्ठ समय प्रदोष काल होता है, जो आज सायं 7:16 बजे से रात 8:20 बजे तक रहेगा।
इसी समय भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
धनतेरस पर क्या खरीदें
धनतेरस पर केवल सोना-चांदी ही नहीं, बल्कि कुछ पारंपरिक वस्तुएं खरीदना भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि ये वस्तुएं घर में समृद्धि और सौभाग्य लाती हैं।
इनमें शामिल हैं —
- कौड़ी और गोमती चक्र (मां लक्ष्मी के प्रतीक)
- साबुत धनिया
- झाड़ू
- बताशा
- सुपारी
इन वस्तुओं को पूजा में शामिल करना घर में धन, सुख और समृद्धि का मार्ग खोलता है।


