बीजेपी ने INDIA ब्लॉक की रैली में 10 लाख लोगों के होने पर उठाए सवाल और इस संख्या की वास्तविकता पर संदेह जताया है। 1 नवंबर 2026 को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित इस रैली में विपक्षी गठबंधन ने भारी भीड़ जुटाने का दावा किया था, जिसे बीजेपी ने खारिज किया है।
रामलीला मैदान की क्षमता और भीड़ के दावे पर विवाद
INDIA ब्लॉक की रैली में 10 लाख लोगों के होने के दावे को लेकर बीजेपी ने रामलीला मैदान की वास्तविक क्षमता पर सवाल उठाए हैं। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने बताया कि रामलीला मैदान लगभग 10-12 एकड़ में फैला है और इसमें अधिकतम 45,000 से 50,000 लोग ही समा सकते हैं। उन्होंने कहा कि रैली के दौरान कुल 28,000 कुर्सियां लगाई गई थीं, जिनमें से 5,000 से 7,000 खाली थीं।
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इसके अलावा, पात्रा ने मैदान के 40% हिस्से के खाली रहने का भी दावा किया है, जो 10 लाख लोगों के दावे के विपरीत है। दिल्ली पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार भी रैली में लगभग 50,000 लोगों की उपस्थिति रही, जो विपक्ष के दावे से काफी कम है।

बीजेपी का आरोप: ट्रिक फोटोग्राफी से भीड़ दिखाने की कोशिश
संबित पात्रा ने कांग्रेस पर ट्रिक फोटोग्राफी के जरिए बड़ी भीड़ दिखाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि तस्वीरों और वीडियो के एंगल से भीड़ को बड़ा दिखाने का प्रयास किया गया, जबकि मैदान की संपूर्ण तस्वीरें वास्तविक स्थिति जाहिर करती हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सच में 10 लाख लोग आए थे तो वे रामलीला मैदान में क्यों नजर नहीं आए। पात्रा ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया और कहा कि इस तरह के दावे राजनीतिक लाभ के लिए अतिशयोक्ति मात्र हैं।
राजनीतिक टीकाकरण और विपक्ष पर निशाना
बीजेपी नेताओं ने INDIA ब्लॉक की रैली को ‘सुपर फ्लॉप’ करार दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे संसद में ही रहेंगे, असली राजनीति में उनका कोई स्थान नहीं है।
बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने विपक्षी दलों को हरियाणा, यूपी, बिहार और पश्चिम बंगाल में मिली हार का जिक्र करते हुए कहा कि वे अपनी निराशा में देश में अराजकता फैलाना चाहते हैं। इस बयान से साफ है कि बीजेपी इस रैली की नाकामी को राजनीतिक महत्व देने से कतरा रही है।

राहुल गांधी का हमला और विपक्ष की प्रतिक्रिया
रैली में राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि देशद्रोह के लिए कार्रवाई होनी चाहिए और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा अमित शाह को कानूनी चुनौती का सामना करना होगा।
राहुल गांधी के इस आक्षेप के बाद विपक्षी दलों ने इस रैली को लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए एक संदेश बताया। हालांकि, बीजेपी के सवालों ने विपक्ष की साख पर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।
इंडिया ब्लॉक की रैली का आम आदमी पर असर
इस विवाद से आम जनता में राजनीतिक अस्थिरता और भ्रम की स्थिति बनी है। जहां विपक्ष 10 लाख लोगों की भीड़ को अपनी ताकत बताता है, वहीं बीजेपी के दावे इस संख्या को बहुत कम आंकते हैं।
ऐसे में आम आदमी की यह चिंता बढ़ती है कि राजनीतिक बयानबाजी के बीच विकास और रोज़मर्रा की समस्याओं पर ध्यान कैसे दिया जाएगा। चुनाव से पहले इस तरह के दावों और आरोप-प्रत्यारोप का असर मतदाता की सोच पर भी पड़ेगा।
आगे क्या हो सकता है इस मामले में
आगामी चुनावों में इस रैली के दावों और बीजेपी के सवालों को दोनों पक्ष राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करेंगे। मीडिया रिपोर्टिंग और सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा गरमाएगा।
इस विवाद का हल केवल सटीक जनसंख्या आंकड़ों और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया की निगरानी से ही संभव है। फिलहाल, यह बहस राजनीतिक दलों के बीच जारी रहेगी और इसका असर चुनावी रणनीतियों पर भी पड़ेगा।



