MPSC पेपर लीक मामले में एसआईटी ने असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर रोहित कोलटक्के को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी इस जांच की बड़ी सफलता मानी जा रही है। रोहित कोलटक्के पर आरोप है कि उन्होंने MPSC के अवर सचिव अभिजीत लेंडवे से ₹2.5 लाख लेकर परीक्षा का पेपर खरीदा था।
MPSC पेपर लीक मामले में रोहित कोलटक्के की गिरफ्तारी
विशेष जांच टीम (SIT) ने 23 अक्टूबर 2026 को नवी मुंबई से असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर रोहित कोलटक्के को गिरफ्तार किया। इसके साथ ही इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 13 हो गई है। जांच में पता चला कि रोहित ने अवर सचिव अभिजीत लेंडवे से पेपर खरीदकर दूसरे लोगों तक पहुंचाया।
👉 यह भी पढ़ें:
यह गिरफ्तारी एमपीएससी पेपर लीक मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई है। इससे पहले अभिजीत लेंडवे, विश्वेश्वर नाकाटे और गोपाल मराठे को भी गिरफ्तार किया जा चुका है।

ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा और पेपर लीक की पृष्ठभूमि
यह मामला महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) द्वारा 22 मार्च 2026 को आयोजित ड्रग इंस्पेक्टर (Group-B) की भर्ती परीक्षा से जुड़ा है। इस परीक्षा में कुल 297 प्रश्न पूछे गए थे, जिनमें से 77 प्रश्न लीक पाए गए।
MPSC ने परीक्षा रद्द कर दी थी और नए सिरे से परीक्षा कराने की घोषणा की थी। यह पेपर लीक घटना आयोग की परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता को गंभीर रूप से प्रभावित करती है।
MPSC पेपर लीक के पीछे की साजिश
जांच में सामने आया कि MPSC के गोपनीय अनुभाग में तैनात ASO विश्वेश्वर नाकाटे ने लैपटॉप पर पेपर टाइप करके उसकी प्रति अवर सचिव अभिजीत लेंडवे को दी थी। इसके बाद अभिजीत ने रोहित कोलटक्के को ₹2.5 लाख में पेपर बेचा।
फिर रोहित ने इस पेपर को पैसे लेकर अन्य लोगों तक पहुंचाया। इस तरह पेपर लीक का पूरा नेटवर्क सक्रिय था, जिसमें अधिकारी, कर्मचारी और बिचौलिये शामिल थे।
गिरफ्तार आरोपियों की पूरी सूची और उनकी भूमिका
अब तक कुल 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें MPSC के अधिकारी अभिजीत लेंडवे, विश्वेश्वर नाकाटे, गोपाल मराठे, बिचौलिये मयूर ठाकरे, प्रवीण पाटिल, अमृत पाटिल समेत कई उम्मीदवार शामिल हैं।
ये सभी परीक्षा की निष्पक्षता को प्रभावित करने और भ्रष्टाचार में शामिल पाए गए हैं। पुलिस ने इनके खिलाफ महाराष्ट्र स्पर्धा परीक्षा अधिनियम और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की है।
MPSC परीक्षा रद्द होने के बाद उम्मीदवारों पर प्रभाव
परीक्षा रद्द होने के कारण हजारों उम्मीदवारों की मेहनत पर पानी फिर गया। अब आयोग ने नए सिरे से परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया है।
यह स्थिति उम्मीदवारों के लिए तनावपूर्ण है क्योंकि उन्हें फिर से तैयारी करनी होगी। साथ ही, भर्ती प्रक्रिया में देरी से प्रशासनिक पदों पर खालीपन भी बना रहेगा।



