पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कस्टम चीफ और चुनाव आयोग के बीच संबंधों को लेकर बड़ा आरोप लगाया है। सीएम मान ने विधानसभा में कहा कि कस्टम चीफ मनीष कुमार, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के भाई हैं। इस बयान ने राजनीतिक हलकों में नई हलचल मचा दी है।
कस्टम चीफ और चुनाव आयुक्त के बीच पारिवारिक संबंध
भगवंत मान ने 23 अक्टूबर 2026 को पंजाब विधानसभा में स्पष्ट किया कि दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कस्टम डिपार्टमेंट के प्रमुख मनीष कुमार, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के सगे भाई हैं। उन्होंने इस पारिवारिक कड़ी का हवाला देते हुए कस्टम विभाग की कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना से जोड़ा।
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यह आरोप उस समय आया जब पंजाब सरकार ने विधानसभा में चुनाव आयोग की मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान लाखों वोट काटे जाने की शिकायत दर्ज करवाई है।

दिल्ली एयरपोर्ट पर सीएम मान के साथ हुई घटना
फ्रांस से लौटते वक्त सीएम मान ने बताया कि उन्हें और उनके सामान को कस्टम अधिकारियों ने करीब दो घंटे तक जांच के बहाने रोका रखा। उन्होंने कहा कि इस दौरान किसी भी प्रकार की संदिग्ध वस्तु नहीं मिली, फिर भी उन पर 50,000 रुपये का चालान काटा गया।
इस कार्रवाई को उन्होंने आम आदमी पार्टी और चुनाव आयोग के बीच चल रहे तनाव के कारण बदले की राजनीति करार दिया।
सीएम मान ने छवि धूमिल करने की कोशिश का आरोप लगाया
भगवंत मान ने केंद्र सरकार और कस्टम अधिकारियों पर आरोप लगाया कि वे एक निर्वाचित मुख्यमंत्री की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रकरण आम आदमी पार्टी के विरुद्ध एक राजनीतिक साजिश का हिस्सा है।
साथ ही आम आदमी पार्टी के अन्य नेताओं ने भी इस मामले को राजनीतिक प्रताड़ना बताया है।
ज्ञानेश कुमार की बेटी मेधा रूपम का संदर्भ
सीएम मान ने विधानसभा में बिना नाम लिए ज्ञानेश कुमार की बेटी और नोएडा की डीएम मेधा रूपम का जिक्र भी किया। उन्होंने कहा कि मेधा रूपम को सुप्रीम कोर्ट से फटकार मिली थी, जो एक नाबालिग के खिलाफ कार्रवाई के मामले में थी। यह बयान भी चुनाव आयोग के खिलाफ सख्त रुख को दर्शाता है।
राजनीतिक विवाद और चुनाव आयोग के खिलाफ प्रस्ताव
यह पूरा विवाद पंजाब विधानसभा में चुनाव आयोग के खिलाफ पेश किए गए प्रस्ताव के दौरान सामने आया। इस प्रस्ताव में मतदान सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। पंजाब सरकार का कहना है कि इस प्रक्रिया में लाखों वोटों को गलत तरीके से काटा गया।
इस विवाद ने पंजाब की राजनीतिक स्थिति को और जटिल बना दिया है और केंद्र-राज्य के बीच तनाव की संभावना बढ़ा दी है।



