मध्य प्रदेश शराब घोटाले में कांग्रेस का बड़ा हमला सामने आया है, जिसमें ₹2.75 करोड़ की एफडीआर और रिश्वत के गंभीर सवाल उठाए गए हैं। यह मामला भोपाल में वर्ष 2024-25 के दौरान दो शराब दुकानों के ठेके देने और उनके लाइसेंस ट्रांसफर प्रक्रिया से जुड़ा है, जिसमें कई अनियमितताएं पाई गई हैं।
फर्जी एफडीआर का खुलासा और बैंक का इनकार
इस शराब घोटाले में जमा कराई गई ₹2,75,53,535 की ई-एफडीआर को AU स्मॉल फाइनेंस बैंक ने फर्जी घोषित किया है। बैंक ने साफ कहा कि उसने यह एफडीआर जारी नहीं की है, जो इस मामले की गंभीरता को दर्शाता है। यह फर्जी एफडीआर शराब ठेका प्रक्रिया में अनियमितताओं का मुख्य सबूत बन गई है।
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इससे पहले विभागीय जांच में यह भी पता चला कि नियमों के विपरीत गैर-भागीदार से बैंक गारंटी स्वीकार की गई।
रिश्वत के आरोप और गिरफ्तारी
मोहित गोगिया नामक आरोपी ने शराब दुकानों के ठेके और लाइसेंस प्रक्रिया में मदद के बदले ₹1 करोड़ की रिश्वत देने का दावा किया है। इसमें ₹50 लाख नकद और ₹50 लाख बैंक ट्रांसफर के रूप में रिश्वत का जिक्र है। यह आरोप मामले की गंभीरता को बढ़ाते हैं और भ्रष्टाचार की व्यापकता को दर्शाते हैं।
गिरफ्तारी के बाद जांच और सख्ती बढ़ाई गई है।
अधिकारी की पद से हटी और निलंबन
अनियमितताओं के सामने आने के बाद मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री व वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा के पूर्व OSD और आबकारी अधिकारी दीपम रायचूरा को उनके पद से हटा दिया गया। आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने 12 अक्टूबर 2026 को उनकी निलंबन का आधिकारिक आदेश भी जारी किया।
यह कार्रवाई विभागीय जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है, जिससे विभाग में जवाबदेही बढ़ेगी।
कांग्रेस का मोदी सरकार पर निशाना
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस शराब घोटाले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से 7 सीधे सवाल पूछे हैं। उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग की है। पटवारी ने सोशल मीडिया पर अपने पोस्ट में इस पूरे मामले को उजागर किया और जवाबदेही की अपील की।
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के संचार प्रभारी जयराम रमेश ने भी इस मामले में भाजपा सरकार को निशाने पर लिया है और स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।
आबकारी विभाग की जांच में मिलीं कई गड़बड़ियां
आबकारी विभाग की 2-सदस्यीय जांच टीम की रिपोर्ट में यह सामने आया कि तय 22 दिनों की समय सीमा में बैंक प्रतिभूति न मिलने के बाद भी कार्रवाई नहीं की गई। इसके अलावा नियमों के खिलाफ बैंक गारंटी स्वीकार करना और अन्य अनियमितताएं भी पाई गईं।
यह विभागीय गड़बड़ियां पूरे मामले की गंभीरता को दर्शाती हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने की जरूरत को रेखांकित करती हैं।
शराब घोटाले का आम आदमी पर प्रभाव और आगे की संभावना
यह शराब घोटाला न केवल प्रशासनिक भ्रष्टाचार को उजागर करता है, बल्कि इससे आम जनता के लिए शराब नीति की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। इससे सरकारी राजस्व को भी नुकसान होता है, जो विकास कार्यों में बाधा डालता है।
आगे जांच पूरी होने पर और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की संभावना है। इससे विभागीय सुधार और पारदर्शिता बढ़ेगी।



