इंदौर में एलआईजी-नवलखा एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना पर 1.25 घंटे की बहस के दौरान ₹350 करोड़ की लागत को लेकर कई सवाल उठे। यह बहस मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में याचिकाकर्ता और लोक निर्माण विभाग (PWD) के बीच हुई, जिसमें परियोजना की उपयोगिता और तकनीकी पक्षों पर गहन चर्चा हुई।
एलआईजी-नवलखा एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना का परिचय
एलआईजी-नवलखा एलिवेटेड कॉरिडोर इंदौर के एबी रोड पर लगभग 6.5 किलोमीटर लंबा प्रस्तावित है। इस परियोजना की अनुमानित लागत ₹350 करोड़ है। इसका उद्देश्य शहर के मुख्य चौराहों के बीच ट्रैफिक जाम को कम करना है।
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कॉरिडोर के अंतर्गत कुल 172 पिलर बनाए जाएंगे, जिनमें पलासिया से एलआईजी तक पिलर निर्माण की शुरुआती खुदाई शुरू हो चुकी है। प्रशासन इस प्रोजेक्ट को 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखता है।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका पर सुनवाई
अक्टूबर 2026 में हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में याचिकाकर्ता और PWD के बीच लगभग 1.25 घंटे तक बहस हुई। याचिकाकर्ता ने परियोजना की लागत, डिज़ाइन और ट्रैफिक सर्वे रिपोर्ट पर सवाल उठाए। वहीं, PWD ने परियोजना को शहर के ट्रैफिक सुधार के लिए आवश्यक बताया।
सुनवाई के बाद कोर्ट ने सभी दलीलों और वीडियो प्रेजेंटेशन को ध्यान से देखा और अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
SGSITS की ट्रैफिक सर्वे रिपोर्ट पर विवाद
बहस का एक अहम केंद्र SGSITS की ट्रैफिक सर्वे और फीजिबिलिटी रिपोर्ट रही। याचिकाकर्ता ने कहा कि रिपोर्ट में परियोजना की उपयोगिता को लेकर खामियां हैं। इसके विपरीत, लोक निर्माण विभाग ने इसे शहर की विकास योजना में महत्वपूर्ण बताया।
यह रिपोर्ट ट्रैफिक डायवर्जन, रोटरी की चौड़ाई, और राइट टर्न की सुविधा जैसी तकनीकी जानकारियों पर आधारित है, जिनपर दोनों पक्षों ने गहन बहस की।
₹350 करोड़ की लागत और तकनीकी पहलुओं पर सवाल
परियोजना की ₹350 करोड़ लागत को लेकर भी कई सवाल उठाए गए। याचिकाकर्ता ने इस खर्च की आवश्यकता और पारदर्शिता पर आपत्ति जताई। साथ ही, 24 मीटर चौड़ी रोटरी, डिजाइन की जटिलताएं, और ट्रैफिक प्रबंधन के तरीके भी बहस में शामिल थे।
इसकी तुलना में प्रशासन ने बताया कि यह निवेश शहर के ट्रैफिक सुधार के लिए अति आवश्यक है और परियोजना के तकनीकी मानकों पर खास ध्यान दिया गया है।
निर्माण कार्य की वर्तमान स्थिति
एलआईजी-नवलखा एलिवेटेड कॉरिडोर के लिए पिलर निर्माण की प्रक्रिया चल रही है। पलासिया से एलआईजी तक खुदाई शुरू हो चुकी है। कुल 172 पिलर बनाए जाने हैं, जो कॉरिडोर के स्थायित्व के लिए जरूरी हैं।
प्रदेश के प्रशासनिक अधिकारी निर्माण कार्य की गति बढ़ाने के निर्देश दे चुके हैं ताकि निर्धारित समयसीमा के भीतर परियोजना पूरी हो सके।
आगे की राह और आम जनता पर प्रभाव
अगर यह परियोजना समय से पूरी होती है, तो इंदौर में ट्रैफिक जाम में कमी आएगी और आवागमन सुगम होगा। हालांकि, लागत और तकनीकी मुद्दों पर स्पष्टता आवश्यक है ताकि जनता का विश्वास बना रहे।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद ही परियोजना की आगे की दिशा तय होगी। फिलहाल प्रशासन निर्माण कार्य को तेज करने पर जोर दे रहा है।



