सोनम वांगचुक ने दिल्ली में हुए प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई को लेकर देश में अघोषित आपातकाल की बात कही है। इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। सोनम वांगचुक ने इस विषय पर अपनी प्रतिक्रिया सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो संदेश के जरिए दी।
दिल्ली में प्रदर्शन और नेताओं की गिरफ्तारी
10 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और अन्य विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान दिल्ली पुलिस ने आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी, सीपीआई(एम) के पिनराई विजयन और आइसा की नेहा बोरा सहित कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया।
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पुलिस की इस कार्रवाई को लेकर सोनम वांगचुक ने कड़ी आपत्ति जताई है और इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताया है।

सोनम वांगचुक का अघोषित आपातकाल पर बयान
सोनम वांगचुक ने कहा कि भारत एक अघोषित आपातकाल की स्थिति से गुजर रहा है, जहां बिना आधिकारिक घोषणा के ही आपातकाल जैसी परिस्थितियां बन रही हैं। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने प्रदर्शन के लिए एकजुटता और शांति की अपील की थी, तब उन्हें उम्मीद नहीं थी कि नेताओं को हिरासत में लिया जाएगा।
उन्होंने नेताओं की जल्द रिहाई की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि 11 अक्टूबर 2026 तक सभी गिरफ्तार नेताओं को रिहा नहीं किया गया, तो वे अनशन या पदयात्रा पर जाने के लिए मजबूर होंगे।
प्रदर्शन का मुख्य कारण और चुनाव आयोग पर सवाल
यह विरोध प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग की ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर गंभीर आपत्तियां जताई हैं।
इस विरोध का उद्देश्य चुनाव आयोग की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल उठाना था। विपक्षी दलों का आरोप है कि वर्तमान चुनाव आयोग लोकतंत्र की संस्थागत स्वतंत्रता को कमजोर कर रहा है।

सोनम वांगचुक की गैरमौजूदगी और उनका संदेश
हालांकि, सोनम वांगचुक खुद इस प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए क्योंकि वे लद्दाख में शीतकालीन जल सुरक्षा परियोजनाओं पर काम कर रहे थे। उन्होंने बताया कि वे जलवायु और पर्यावरण से जुड़े संकटों से निपटने के लिए व्यस्त हैं।
उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि वे इस समय राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आर्टिफिशियल ग्लेशियर प्रोजेक्ट्स और ग्लेशियर झील बाढ़ सुरक्षा के लिए काम कर रहे हैं, जो हिमालय में पानी की सुरक्षा के लिए आवश्यक हैं।
प्रदर्शन और गिरफ्तारी का आम जनता पर प्रभाव
दिल्ली में हुई इस प्रदर्शन और गिरफ्तारी की घटना ने आम जनता के बीच असुरक्षा और चिंता की भावना बढ़ा दी है। लोग लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा और पुलिस की कार्रवाई के संतुलन को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
यदि नेताओं की रिहाई नहीं होती है, तो यह स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो सकती है, जिससे सामाजिक और राजनीतिक स्थिरता पर प्रभाव पड़ सकता है।
आगे की संभावनाएं और राजनीतिक माहौल
सोनम वांगचुक की चेतावनी के बाद सरकार पर दबाव बढ़ सकता है। 11 अक्टूबर तक नेताओं की रिहाई को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो सकती है।
विगत घटनाओं और राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए, इस मुद्दे पर और व्यापक आंदोलन या वार्ता की संभावना बनी हुई है। यह भी स्पष्ट है कि इस प्रदर्शन ने देश में लोकतंत्र की मजबूती और स्वतंत्रता के मुद्दे को फिर से उभारा है।



