भाजपा की राज्यसभा लिस्ट पर उत्तर प्रदेश में बगावत की आहट सुनाई दे रही है। यह स्थिति तब उभरी है जब भारतीय जनता पार्टी ने 5 अक्टूबर 2026 को यूपी की 10 राज्यसभा सीटों में से 8 के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा की। इस सूची में कई पुराने नेताओं को टिकट न देने और नए चेहरों को मौका देने के निर्णय से कई वरिष्ठ नेता नाराज हैं।
भाजपा की राज्यसभा लिस्ट में पुराने नेताओं को बाहर का रास्ता
भाजपा ने इस बार राज्यसभा चुनाव के लिए अपनी रणनीति के तहत सभी मौजूदा सांसदों के टिकट काट दिए हैं। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और केंद्रीय राज्य मंत्री बी. एल. वर्मा जैसे बड़े नाम इस सूची में शामिल नहीं हैं। इसके साथ ही 8 उम्मीदवारों की सूची में नए और क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए चयन किया गया है।
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इस सूची में धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार को शामिल किया गया है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर की नाराजगी और बगावत के संकेत
भाजपा की राज्यसभा लिस्ट पर उत्तर प्रदेश में बगावत की आहट की सबसे बड़ी वजह पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर की नाराजगी है। लंबे समय से पार्टी में उपेक्षित महसूस कर रहे कौशल किशोर ने सार्वजनिक तौर पर अपनी असंतोष जताई है। उनके बेटे विकास किशोर द्वारा फेसबुक पर की गई विवादास्पद पोस्ट ने इस स्थिति को और बढ़ावा दिया।
विकास किशोर ने लिखा, “जिस परिवार में माँ और बाप का मान और सम्मान न हो, उस परिवार में नहीं रहना चाहिए!” इस पोस्ट के बाद कयास लगाए जाने लगे कि कौशल किशोर पार्टी छोड़ सकते हैं।
भाजपा ने नाराजगी कम करने के लिए कदम उठाए
कौशल किशोर और उनके बेटे की नाराजगी को देखते हुए भाजपा ने डैमेज कंट्रोल करते हुए विकास किशोर को यूपी भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा का प्रदेश उपाध्यक्ष नियुक्त किया है। इस नियुक्ति के बाद दोनों ने कहा कि वे पार्टी के साथ हैं और उनकी नाराजगी दूर हो गई है।
यह कदम भाजपा की संगठनात्मक मजबूती और एकजुटता बनाए रखने की कोशिश माना जा रहा है।
सामाजिक और जातीय समीकरणों को ध्यान में रखकर चयन
भाजपा की राज्यसभा लिस्ट में सामाजिक और जातीय संतुलन का विशेष ध्यान रखा गया है। सूची में 3 ओबीसी, 3 सामान्य वर्ग (जिसमें 2 ब्राह्मण और 1 ठाकुर शामिल) और 2 अनुसूचित जाति के उम्मीदवार शामिल हैं।
इसके अलावा, महिलाओं को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है। इस प्रकार पार्टी ने विभिन्न वर्गों को संतुलित रूप से शामिल कर राजनीतिक समीकरणों को साधने का प्रयास किया है।
उत्तर प्रदेश में आगामी राज्यसभा चुनाव का महत्व
उत्तर प्रदेश में 16 अक्टूबर 2026 को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले जारी भाजपा की सूची ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। यह चुनाव राज्य की राजनीतिक दिशा और केंद्र में भाजपा की पकड़ के लिए अहम माना जा रहा है।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने घोषित उम्मीदवारों को बधाई दी है और पार्टी के अंदर इस सूची को लेकर सकारात्मक माहौल बनाने का प्रयास चल रहा है।
भविष्य में पार्टी में होने वाले संभावित बदलाव
भाजपा की राज्यसभा लिस्ट पर उत्तर प्रदेश में बगावत की आहट आने के बावजूद पार्टी नेतृत्व ने संगठन को मजबूत बनाए रखने के लिए कई कदम उठाए हैं। हालांकि, पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर और उनके समर्थकों की नाराजगी भविष्य में राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।
इस स्थिति पर नजर रखी जा रही है कि आगे पार्टी में और क्या बदलाव हो सकते हैं और यह उत्तर प्रदेश की राजनीति पर किस प्रकार असर डालेगा।



