इंदौर जिले में एसआईआर प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से 4.47 लाख नाम हटाने का निर्णय लिया गया। इस प्रक्रिया के दौरान हटाए गए मतदाताओं की पुनः जांच के लिए बीएलओ घर-घर जाकर संपर्क करेंगे। इस कदम का उद्देश्य पात्र मतदाताओं को सूची में पुनः शामिल करना है।
एसआईआर में 4.47 लाख नाम हटने के कारण
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान 4,47,123 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए। इसका मुख्य कारण यह था कि ये मतदाता फॉर्म भरकर सत्यापन में शामिल नहीं हुए। इसलिए, इनके नाम प्रारंभिक मतदाता सूची में शामिल नहीं किए जा सके। इस प्रक्रिया से पहले इंदौर जिले में कुल 28,67,294 पंजीकृत मतदाता थे, जो एसआईआर के बाद घटकर 24,20,171 रह गए।
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बीएलओ द्वारा घर-घर संपर्क अभियान
भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार, एसआईआर में हटाए गए मतदाताओं का पुनः सत्यापन करने के लिए बीएलओ जिला के 3,226 मतदान बूथों पर घर-घर जाकर संपर्क करेंगे। इस अभियान का उद्देश्य हटाए गए मतदाताओं को खोजकर उनके पात्रता की पुष्टि करना है। पात्र पाए जाने पर उनके नाम मतदाता सूची में पुनः जोड़े जाएंगे।
मतदाता संख्या में एसआईआर के बाद के बदलाव
एसआईआर प्रक्रिया के दौरान 66,825 नए मतदाताओं के नाम भी जोड़े गए। 21 फरवरी 2026 को अंतिम मतदाता सूची में मतदाताओं की संख्या 24,86,996 थी। इसके बाद से अक्टूबर 2026 तक 15,567 नाम और जोड़े गए हैं, जिससे कुल मतदाता संख्या 25,02,563 हो गई है। यह दर्शाता है कि एसआईआर के बाद भी सूची को निरंतर अपडेट किया जा रहा है।
एसआईआर प्रक्रिया का प्रशासनिक समीक्षा
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, मध्य प्रदेश ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस पुनः सत्यापन अभियान की समीक्षा की। इस बैठक में इंदौर के कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी शिवम वर्मा सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे। उन्होंने बीएलओ के कार्यों की निगरानी और अभियान के सुचारू संचालन पर चर्चा की।
मतदाता सूची से नाम हटने की सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र
एसआईआर के प्रारंभिक प्रकाशन में इंदौर-5 क्षेत्र में सबसे अधिक 87,591 मतदाताओं के नाम हटे। इसके बाद इंदौर-1 में 75,014 और इंदौर-2 में 72,969 नाम घटे। इसके अतिरिक्त सांवेर और महू क्षेत्रों में भी दसियों हजार मतदाताओं के नाम हटाए गए। अब इन क्षेत्रों में बीएलओ द्वारा विशेष रूप से हटाए गए नामों की पुनः जांच होगी।
बीएलओ सत्यापन और आगे की प्रक्रिया
बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर किए जाने वाले सत्यापन में जो मतदाता सही और पात्र पाए जाएंगे, उनके नाम मतदाता सूची में पुनः शामिल किए जाएंगे। इसके बाद दावे-आपत्तियां भी आमंत्रित की जाएंगी। आपत्तियों का निराकरण करने के बाद अंतिम सूची तैयार की जाएगी, जिससे मतदाता सूची की विश्वसनीयता और सटीकता सुनिश्चित होगी।



