भोपाल। प्रदेश के बड़बोले कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भाजपा कोर कमेटी की बैठक में कहा कि सीएम से बात नहीं हो पाती। बड़ा सवाल यह है कि लगभग हर मंगलवार को कैबिनेट की बैठक होती। इसमें सीएम से सीधे बात की जा सकती है, लेकिन मंत्री विजयवर्गीय अक्सर इसमें शामिल नहीं होते।
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मध्यप्रदेश के नए प्रदेश प्रभारी बिप्लब कुमार देव और प्रदेश संगठन महामंत्री चंद्रशेखर तिवारी के साथ हुई पहली कोर ग्रुप बैठक में मंत्री विजयवर्गीय ने खुलकर सीएम के खिलाफ मोर्चा खोला। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा किकोशिश के बावजूद सीएम से 15-15 दिन तक बात नहीं हो पाती। अब यह बात अलग है कि सीएम ने यह नहीं पूछा कि विजयवर्गीय कैबिनेट की बैठक में क्यों नहीं आते? यह भी नहीं पूछा कि उन्होंने सीएम से बात करने के लिए उन्हें या उनके सचिव को कितनी बार फोन लगाया?
15 दिन में दो बार तो इंदौर आ ही जाते हैं सीएम
भाजपा के नेता कैलाश विजयवर्गीय की इस बात पर इसलिए भी भरोसा नहीं कर रहे, क्योंकि 15 दिन में कम से कम दो बार तो सीएम खुद ही इंदौर आ जाते हैं। सीएम के अधिकांश कार्यक्रम में मंत्री विजयवर्गीय मंच पर विराजमान नजर आते हैं, ऐसे में 15 दिन में बात नहीं हो पाने की बात कोई पचा नहीं पा रहा।
बेटे आकाश से कैसे हो जाती है मुलाकात
मंत्री विजयवर्गीय के बयान के अगले ही दिन एक फोटो सोशल मीडिया पर तैर रहा होता है, जिसमें वे सीएम डॉ.मोहन यादव से भोपाल में मुलाकात करते दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में भाजपा नेता यह भी सवाल उठा रहे हैं कि मंत्री पिता को सीएम समय नहीं देते, ऐसे में बेटे से कैसे मुलाकात हो जाती है?
सबको पता है कितने मधुर हैं संबंध
मंत्री विजयवर्गीय और सीएम के बीच कितने मधुर संबंध हैं, यह प्रदेश ही नहीं देश के भाजपा पदाधिकारी भी जानते हैं। कदम-कदम पर विरोध कर, दिल्ली तक माहौल बनाने का कोई मौका विजयवर्गीय नहीं छोड़ते। यहां तक कि कैबिनेट तक में विरोध की आवाज बुलंद कर चुके हैं। ऐसे में सीएम पर बात नहीं करने का आरोप लगाना, किसी को समझ नहीं आ रहा।
चिट्ठी लिखकर भी फैलाई थी सनसनी
लोग विजयवर्गीय की वह चिट्ठी भी नहीं भूले हैं, जिसके माध्यम से उन्होंने सीएम पर इंदौर की उपेक्षा के आरोप लगाए थे। बाद में वह चिट्ठी मीडिया में आ गई तो विजयवर्गीय यह कहने लगे कि उन्हें नहीं पता चिट्ठी कहां से आई। एक बात और विजयवर्गीय ने चिट्ठ से इनकार तो कर दिया, लेकिन उसे प्रकाशित करने वालों पर आज तक कोई एक्शन नहीं लिया। इसका मतलब साफ है कि वह चिट्ठी विजयवर्गीय ने ही सएण पर दबाव बनाने के लिए मीडिया तक पहुंचवाई थी।



