पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर कड़े आरोप लगाते हुए उन्हें डाकू और चोर बताया है। ममता ने ज्ञानेश कुमार पर वोट काटने और चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाया है, जिससे पश्चिम बंगाल की 208 में से 150 सीटें भाजपा को ‘उपहार’ में मिल गईं। यह आरोप पश्चिम बंगाल चुनावों को लेकर चल रही सियासी बहस में नया मोड़ लाता है।
ममता बनर्जी ने ज्ञानेश कुमार को डाकू कहा और इस्तीफे की मांग की
ममता बनर्जी ने हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को “डाकू” और “चोर” कहकर निशाना बनाया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने वोटरों के अधिकारों को छीना है और इसलिए ज्ञानेश कुमार को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। इससे पहले सितंबर 2026 के अंतिम सप्ताह में भी ममता ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी और आपराधिक कार्यवाही की मांग की थी।
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ममता के इस बयान ने चुनाव आयोग के ऊपर राजनीतिक दबाव बढ़ा दिया है। उन्होंने ज्ञानेश कुमार को “वैनिश कुमार” नाम से भी संबोधित किया, जो चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाता है।

वोट चोरी और भाजपा को फायदा पहुंचाने के आरोप
ममता बनर्जी का आरोप है कि चुनाव आयोग ने भाजपा को फायदा पहुंचाने के लिए चुनावी प्रक्रिया में ईवीएम सहित कई तकनीकी गड़बड़ियां की हैं। उनका दावा है कि इस वजह से पश्चिम बंगाल की कुल 208 विधानसभा सीटों में से 150 सीटें भाजपा को बिना मुकाबले दी गई हैं।
उन्होंने कहा कि यह ‘वोट चोरी’ लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ है और इसने चुनाव की निष्पक्षता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। ममता का यह आरोप पूरे विपक्षी गठबंधन के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) पर विवाद
चुनाव आयोग द्वारा पश्चिम बंगाल में किए गए ‘विशेष सघन पुनरीक्षण’ (SIR) ने इस विवाद को और बढ़ा दिया है। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के तहत लाखों मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए।
ममता का कहना है कि SIR वास्तव में भाजपा के लिए एक “विशेष प्रोत्साहन” साबित हुआ, जिसने उनके चुनावी दावों को मजबूती दी। इस कदम से मतदाता अधिकारों का हनन हुआ है और लोकतंत्र की बुनियाद कमजोर हुई है।

प्रशासनिक और तकनीकी आरोपों से चुनाव आयोग पर दबाव
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग की आईटी महानिदेशक सीमा खन्ना और मुख्य चुनाव आयुक्त दोनों पर मिलकर चुनाव प्रक्रिया को “हाइजैक” करने का आरोप लगाया है। उन्होंने बंगाल चुनाव के सभी रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने की मांग की है।
यह कदम चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाता है और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की जरूरत को दर्शाता है। विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर और सख्त रुख अपना सकते हैं।
दिल्ली में विपक्षी गठबंधन की बैठक में ममता का कड़ा बयान
ममता बनर्जी का यह तीखा बयान दिल्ली में विपक्षी ‘INDIA’ गठबंधन की बैठक के बाद आया है। इस बैठक में टीएमसी के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी, डेरेक ओ’ब्रायन, डोला सेन और महुआ मोइत्रा भी मौजूद थे।
विपक्षी दलों ने लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने वाले इन मुद्दों पर एकजुट होकर आगे आंदोलन की रणनीति बनाने का फैसला किया है। यह गठबंधन चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता के लिए सख्त कदम उठा सकता है।
आगे क्या हो सकता है और आम आदमी पर असर
ममता बनर्जी द्वारा लगाए गए चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त पर आरोपों के बाद राजनीतिक माहौल और गर्मा गया है। अगर ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो चुनाव आयोग के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सकती है।
आम लोगों के लिए यह मामला महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सीधे उनके मताधिकार और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा है। चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता न होने पर जनता का लोकतंत्र में विश्वास कमजोर हो सकता है। इसलिए इस मामले की गहराई से जांच होना जरूरी है।



