मणिपुर का अधिकांश क्षेत्र छह महीने के लिए अशांत क्षेत्र घोषित कर दिया गया है। केंद्र सरकार ने गृह मंत्रालय के आदेश के तहत मणिपुर के कई इलाकों में सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम, 1958 (AFSPA) को अगले छह महीनों तक लागू रखा है।
मणिपुर में अशांत क्षेत्र की घोषणा और AFSPA का विस्तार
गृह मंत्रालय ने 1 अक्टूबर, 2026 से प्रभावी आदेश के तहत मणिपुर के अधिकांश हिस्सों को अशांत क्षेत्र घोषित किया है। यह आदेश छह महीने तक लागू रहेगा और राज्य के 13 पुलिस थानों के अधिकार क्षेत्र को छोड़कर पूरे राज्य में AFSPA लागू रहेगा।
👉 यह भी पढ़ें:
ये 13 थाने मुख्य रूप से घाटी क्षेत्र के हैं, जिनमें इंफाल वेस्ट, इंफाल ईस्ट, थौबल, बिश्नुपुर और काकचिंग शामिल हैं। इन इलाकों को फिलहाल इस अधिनियम से बाहर रखा गया है।

कामजोंग जिले में चार नागा ग्रामीणों की हत्या
24 सितंबर, 2026 को कामजोंग जिले के भारत-म्यांमार सीमा पर स्थित पिलोंग गांव में संदिग्ध उग्रवादियों ने गोलीबारी कर चार नागा नागरिकों को मौत के घाट उतार दिया। ये नागरिक तांगखुल नागा समुदाय से थे।
मारे गए व्यक्तियों की पहचान फामी जाजो, उनके पिता वारेशिम जाजो, बेटरसन जाजो और निंगथेम काशक के रूप में हुई है। घटना के समय पांच ग्रामीण घटनास्थल पर मौजूद थे, जिनमें से एक व्यक्ति भागकर पुलिस को सूचना देने में कामयाब रहा।
नागा संगठन ने म्यांमार स्थित उग्रवादी संगठन पर हमले का आरोप लगाया
स्थानीय नागा संगठन ‘तांगखुल नागा लॉन्ग’ (TNL) और नागा पीपल्स फ्रंट (NPF) के राज्य अध्यक्ष अवांगबोउ न्यूमई ने इस हमले की जिम्मेदारी म्यांमार स्थित ‘कुकी नेशनल आर्मी-बर्मा’ (KNA-B) पर डाली है। उन्होंने कहा कि यह संगठन सीमा पार से इस तरह की हिंसा को अंजाम देता रहा है।
यह आरोप मणिपुर की सुरक्षा स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है। ऐसे हमले क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा सकते हैं और स्थानीय जनता की सुरक्षा चिंता को बढ़ावा देते हैं।
हत्याकांड के विरोध में 24 घंटे का बंद
घटना के बाद तांगखुल नागा लॉन्ग ने अपने क्षेत्र में 25 सितंबर सुबह 7 बजे से 26 सितंबर सुबह 7 बजे तक 24 घंटे का आपातकालीन बंद घोषित किया है। इस बंद का उद्देश्य हत्या के विरोध में आक्रोश व्यक्त करना और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाना बताया गया है।
इस बंद से स्थानीय स्तर पर आवागमन और व्यापार प्रभावित हुआ है। हालांकि, इसका उद्देश्य क्षेत्र में शांति बहाल करना और हिंसा को रोकना है।
मणिपुर में AFSPA लागू होने का मतलब और प्रभाव
AFSPA के तहत सुरक्षा बलों को विशेष अधिकार मिलते हैं जैसे कि संदिग्धों को हिरासत में लेना और बिना वारंट के कार्रवाई करना। इसे राज्य सरकार और केंद्र सरकार अशांति के कारण लागू करती हैं।
मणिपुर में AFSPA लागू होने का मतलब है कि क्षेत्र में सुरक्षा बलों की सक्रियता बढ़ेगी। हालांकि, यह आम नागरिकों के अधिकारों और दैनिक जीवन पर असर डालता है, जिससे विवाद और असंतोष भी पैदा हो सकता है।
आगे की संभावनाएं और क्षेत्रीय स्थिरता पर प्रभाव
मणिपुर में अशांत क्षेत्र की घोषणा और AFSPA का विस्तार सुरक्षा बलों को हिंसा रोकने में मदद कर सकता है। लेकिन, हिंसा की इस स्थिति को समाप्त करने के लिए संवाद और स्थायी समाधान जरूरी हैं।
स्थानीय नागा संगठनों की आपत्तियों और सीमा पार उग्रवादी गतिविधियों के मद्देनजर, क्षेत्रीय स्थिरता के लिए राजनीतिक और सामजिक प्रयासों की आवश्यकता है। फिलहाल, सुरक्षा व्यवस्था में सुधार और हिंसा रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।




