उज्जैन। उज्जैन में पदस्थ खाद्य सुरक्षा अधिकारी बसंत दत्त शर्मा पिछले आठ साल से एक ही जगह पदस्थ हैं। उनके खिलाफ लगातार शिकायतों के बाद भी उनका उज्जैन में ही बने रहना कई सवाल खड़े करता है। ताज्जुब इस बात का है कि पीएमओ तक शिकायत के बाद भी उनका कुछ न बिगड़ा।
मावा व्यापारियों ने पीएम से की थी शिकायत
मावा व्यापारी संघ नागदा के अध्यक्ष गोविंदलाल मोहता ने प्रधानमंत्री को 2023 में पत्र लिखकर बसंत दत्त शर्मा की शिकायत की थी। इसमें लिखा गया था कि मां कृपा कोल्ड स्टोरेज धाकड़ स्कूल के पीछे, उन्हेल तहसील नागदा जिला उज्जैन में दिनांक 14/05/2023 को खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा बसंत शर्मा खाद्य सुरक्षा अधिकारी के नेतृत्व में निरीक्षण किया गया। इसमें 973 डलिया लगभग 25000 किलो माल पड़ा था। इसमें से 55 डलिया मावा 1375 किलो एवं 17 दलिया मावा 425 किलो नागदा के दो व्यापारियों का था।
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जांच में सही पाया गया था मावा
पत्र में लिखा गया है कि प्रशासन के द्वारा मावे की मानक स्तर की जांच करने हेतु मावा के दो व्यापारियों द्वारा नमूने दिए गए थे। एक के तीन और एक का एक नमूना 14/05/2023 को ही दे दिए गए थे। नमूने राज्य प्रयोगशाला भोपाल भेज दिए गए थे। राज्य प्रयोगशाला द्वारा 01/06/2023 को मावा मानक स्तर का घोषित किया गया। मांगने पर इसकी रिपोर्ट 23 जून को व्यापारियों को दी गई। इसे मावा व्यापारियों की अभिरक्षा में प्रशासन द्वारा विक्रय न करने की शर्त पर मां कृपा कोल्ड स्टोरेज में रखा गया। उस कोल्ड स्टोरेज को सील कर दिया गया। 26/06/2023 को व्यापारियों द्वारा विक्रय की परमिशन मांगने पर प्रशासन द्वारा 14/07/2023 को आदेश दिया गया कि मावा का तीसरा पाठ मैसूर सेंट्रल फूड लैब में भेजा गया है, जब तक उसकी रिपोर्ट नहीं आ जाती माल नहीं छूटेगा। यदि व्यापारी उस माल की कीमत की बैंक गारंटी या बैंक ड्राफ्ट जमा करें तब वह माल विक्रय की परमिशन दी जाएगी।
रिपोर्ट से पहले ही नकली घोषित कर दिया
पीएम को लिखे पत्र में व्यापारियों ने इस कार्रवाई को पूरी तरीके से व्यापार को खत्म करने वाला बताया। पत्र में लिखा गया कि बसंत शर्मा ने खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम 2006 एवं 2011 के कानून की पूरी तरह से धज्जियां उड़ा दी हैं। केवल व्यापारियों को परेशान करना एवं अपनी इमेज को चमकाना इस कार्रवाई का मूल उद्देश्य सिद्ध होता है। मध्य प्रदेश शासन एवं माननीय कलेक्टर द्वारा मिलावट मुक्ति अभियान के तहत सही कार्रवाई करने के आदेश दिए गए थे, लेकिन अधिकारियों ने अपनी इमेज चमकाने के लिए नियमों को ताक पर रखकर कार्रवाई की। माल की जांच रिपोर्ट नहीं आई उसके पहले ही माल को विभाग ने नकली घोषित कर दिया।
मोबाइल टेस्टिंग लैब से नहीं कराई जांच
पत्र में लिखा गया था कि मध्य प्रदेश शासन द्वारा चलित मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब का निर्माण किया गया है। उसकी रिपोर्ट को मान्य किया जाता है, लेकिन प्रशासन ने मौके पर बुलाकर उस मावे की मोबाइल टेस्टिंग लैब से जांच नहीं कराई। बिना किसी ठोस कारण के 25000 किलो के लगभग मावा सील कर दिया गया एवं बिना किसी सरकारी आदेश के फूड इंस्पेक्टर बसंत शर्मा द्वारा कोल्ड स्टोरेज को भी सील कर दिया गया। पत्र में लिखा गया है कि ऐसा कोई प्रावधान कानून में नहीं है। इससे उस व्यक्ति का व्यापार अलग प्रभावित हो रहा है। पत्र में व्यापारियों को फॉर्म नंबर 6 नहीं देने की बात भी कही गई है।
बिना किसी कारण व्यापार को नुकसान
पत्र में लिखा है कि विभिन्न समाचार पत्रों में खबर आने के कारण व्यापारियों का व्यापार पूरी तरह से चौपट हो गया है एवं बिना किसी अपराध के व्यापारियों के सामाजिक एवं व्यापार की गुडविल को पूरी तरह से नुकसान पहुंचा है। नागदा-रतलाम क्षेत्र का मावे का व्यापार 70 साल पुराना है। महाराष्ट्र, गुजरात मध्य प्रदेश के विभिन्न शहरों में काफी फेमस है एवं यहां के व्यापारियों द्वारा सप्लाई की जाती है। पत्र में लिखा है कि आ रही परेशानियों के कारण व्यापार ठप हो गए हैं एवं यह व्यापार खत्म होने की कगार पर है। प्रशासन द्वारा कुछ अधिकारियों के गलत काम के कारण व्यापार बहुत बदनाम हो गया। इससे व्यापारियों के अंदर डर एवं भय का माहौल है। बिना किसी अपराध के व्यापारियों को सजा मिल रही है, क्योंकि संविधान द्वारा प्रदत्त स्वतंत्रता पूर्वक जीवन यापन एवं व्यापार करने के अधिकार को नुकसान पहुंचा रहा है। पत्र में मामले की निष्पक्ष जांच करवा कर माल दिलाने की बात लिखी गई थी।
गाय और भैंस के मावे के मानक पर सवाल
पत्र में लिखा गया था कि वर्तमान में गाय का और भैंस के मावे का एक ही मानक है। गाय के मावे का जो मानक है वह भैंस के मावे की तुलना में अलग है। पीएम से कहा गया था कि वे FSSI को निर्देशित करें कि गाय के मावे का मानक सही किया जाए, जिससे व्यापारियों को हो रही परेशानी से कुछ राहत मिल जाए। पत्र में लिखा गया था कि यह सुनिश्चित की जाए कि जब तक जांच रिपोर्ट आ जाए जब तक व्यापारियों के नाम सार्वजनिक न किए जाएं। इससे उनकी गुडविल पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है।
मिठाइयों के स्टैंडर्ड पर भी उठाए सवाल
पत्र में लिखा गया था कि वर्तमान समय में मिठाइयों का कोई भी स्टैंडर्ड नहीं है। इसलिए FSSI को इसके लिए भी निर्देशित करें कि वह मिठाइयों के स्टैंडर्ड तय करे, जिससे मिलावट पर अंकुश लगाया जा सके। जनता को शुद्ध चीज उपलब्धं हो सके एवं किसानों को दूध के एवं मावे के सही दाम मिल सकें। पत्र में घटना की सही और निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए नियमों के उल्लंघन के दोषियों पर कार्रवाई की मांग की गई थी।



