खाड़ी संकट के बीच भारत का पेट्रोल-डीजल निर्यात बढ़ा है, जिससे कई देशों की भारत पर निर्भरता बढ़ गई है। वित्तीय वर्ष 2026 के अप्रैल से अगस्त तक के आंकड़ों के अनुसार, पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात सालाना आधार पर करीब 46 प्रतिशत की तेज़ी से बढ़ा है। यह वृद्धि खाड़ी क्षेत्र में हो रहे संकट और पारंपरिक आपूर्ति मार्गों में बाधाओं के कारण हुई है।
पेट्रोल-डीजल निर्यात में अप्रत्याशित उछाल
सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि केवल अगस्त 2026 में पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात 63.27 प्रतिशत बढ़कर 6.81 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। इस दौरान भारत ने कई नए बाजारों में अपनी पकड़ मजबूत की है। खासकर केन्या में भारत पेट्रोलियम उत्पादों का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बन गया है, जिसने पारंपरिक सप्लायर्स जैसे यूएई और सऊदी अरब को पीछे छोड़ दिया है।
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तुर्की और रूस की बढ़ती भारत पर निर्भरता
लाल सागर और खाड़ी संकट के चलते तुर्की ने अगस्त 2026 में भारत से रिकॉर्ड स्तर पर डीजल की खरीद की है। रूस, जिसे यूक्रेन युद्ध के कारण घरेलू रिफाइनिंग क्षमताओं में कमी का सामना करना पड़ रहा है, अब भारत से रिफाइंड तेल का आयात बढ़ा रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह भारत की वैश्विक रिफाइंड ईंधन बाजार में बढ़ती भूमिका का संकेत है।
खाड़ी संकट से प्रभावित पारंपरिक आपूर्ति मार्ग
सऊदी अरब की प्रमुख “ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन” के बंद होने और होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावट के कारण खाड़ी क्षेत्र के रिफाइनरियों की क्षमता प्रभावित हुई है। इसके अलावा, यमन के हूती विद्रोहियों के हमलों ने लाल सागर मार्ग को असुरक्षित बना दिया है। इन कारणों से पारंपरिक निर्यात मार्ग बाधित हुए हैं, जिससे भारत जैसे अन्य आपूर्तिकर्ताओं की मांग बढ़ी है।
भारत सरकार ने निर्यात शुल्क में कटौती की
अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए भारत सरकार ने सितंबर 2026 में पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात शुल्क में 1 से 5 रुपये तक की कटौती की है। यह कदम निर्यात को बढ़ावा देने और वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए उठाया गया है।
घरेलू तेल भंडार और कीमतों पर संकट का असर
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, खाड़ी संकट के कारण भारत में कच्चे तेल की कीमतें प्रभावित हुई हैं। हालांकि, भारत के पास आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए 76 से 80 दिनों की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त रणनीतिक तेल भंडार मौजूद है। इससे घरेलू तेल आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने में मदद मिली है।
विस्तारित रिफाइनिंग क्षमता से भारत को लाभ
भारत की कुल रिफाइनिंग क्षमता अब लगभग 26.7 करोड़ टन प्रति वर्ष तक पहुंच चुकी है। सरकार 2030 तक इसे 30-31 करोड़ टन और बाद में 45 करोड़ टन तक बढ़ाने का लक्ष्य रखती है। नई रिफाइनरियों और विस्तार परियोजनाओं के कारण भारत वैश्विक बाजार में एक भरोसेमंद सप्लायर बन रहा है।



