इंदौर। शहर के चर्चित पिनाकल डिजायर प्रोजेक्ट से जुड़ा जमीन विवाद अब पुलिस केस तक पहुंच गया है। निपानिया क्षेत्र की करीब 22 हेक्टेयर जमीन के कथित लेन-देन और प्लॉट बिक्री को लेकर 16 लोगों की शिकायत पर क्राइम ब्रांच ने संजय अग्रवाल समेत चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। आरोपियों में संजय अग्रवाल, नीना पति संजय अग्रवाल, रीतू पति मनोज अग्रवाल और गुरनाम सिंह धालीवाल के नाम शामिल हैं। पुलिस ने धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज और आपराधिक षड्यंत्र सहित गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है।
इंदौर। शहर के चर्चित पिनाकल डिजायर प्रोजेक्ट से जुड़ा जमीन विवाद अब पुलिस केस तक पहुंच गया है। निपानिया क्षेत्र की करीब 22 हेक्टेयर जमीन के कथित लेन-देन और प्लॉट बिक्री को लेकर 16 लोगों की शिकायत पर क्राइम ब्रांच ने संजय अग्रवाल समेत चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। आरोपियों में संजय अग्रवाल, नीना पति संजय अग्रवाल, रीतू पति मनोज अग्रवाल और गुरनाम सिंह धालीवाल के नाम शामिल हैं। पुलिस ने धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज और आपराधिक षड्यंत्र सहित गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है।
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करीब 22 एकड़ जमीन के सौदे में कथित धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और एक ही संपत्ति को लेकर अलग-अलग लेनदेन किए जाने के आरोपों में क्राइम ब्रांच ने संजय अग्रवाल समेत चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धारा 420, 409, 467, 468 और 120-बी के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। एफआईआर में संजय अग्रवाल, वीणा अग्रवाल, रितु अग्रवाल और गुरुदास धारीवाल के नाम आरोपी के तौर पर दर्ज हैं। शिकायत और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने यह कार्रवाई की है।
करीब 9 हेक्टेयर जमीन, करोड़ों के लेनदेन का आरोप
मामला इंदौर के खजराना क्षेत्र में स्थित सर्वे नंबर 260/1, 261/1, 261/2 और 264/1 की जमीन से जुड़ा बताया गया है। एफआईआर के अनुसार इन जमीनों का कुल क्षेत्रफल करीब 8.991 हेक्टेयर यानी लगभग 22 एकड़ है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि वर्ष 2014 से 2015 के बीच जमीन के सौदों के नाम पर करोड़ों रुपये की राशि ली गई और इसके बाद जमीन की रजिस्ट्री तथा बिक्री को लेकर विवाद खड़ा हुआ। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि करीब 22 एकड़ जमीन में से लगभग 9.3 एकड़ भूमि को कृषि भूमि बताकर बेच दिया गया, जबकि इससे संबंधित जमीन के विकास और भूखंडों की बिक्री की प्रक्रिया पहले ही चल रही थी।
एक जमीन, कई दावे
कुछ भूखंडों के संबंध में खरीदारों से रकम लेने के बावजूद उनकी बिक्री और दस्तावेजी प्रक्रिया को लेकर कथित तौर पर अनियमितता की गई। एफआईआर में आरोप है कि कुछ भूखंडों को बाद में अन्य व्यक्तियों के पक्ष में भी बिक्री दस्तावेजों के जरिए हस्तांतरित कर दिया गया। शिकायत के मुताबिक जमीन के सौदों के बदले चेक और आरटीजीएस के माध्यम से भुगतान किया गया था। आरोप है कि रकम लेने के बावजूद संबंधित भूखंडों की बिक्री-प्रक्रिया पूरी नहीं की गई और बाद में उन्हें दूसरे लोगों के पक्ष में कर दिया गया।
दस्तावेजों को लेकर भी सवाल
एफआईआर में कूटरचित दस्तावेजों और बिक्री दस्तावेज तैयार कर जमीन के लेनदेन किए जाने के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने इन्हीं आरोपों के आधार पर धोखाधड़ी के साथ-साथ दस्तावेजों की कूटरचना से जुड़ी धाराएं भी लगाई हैं। अब जांच में संबंधित रजिस्ट्री, भुगतान, जमीन के रिकॉर्ड और बिक्री दस्तावेजों की पड़ताल की जाएगी।
शिकायत की जांच के बाद केस
एफआईआर के मुताबिक 6 अगस्त और 18 अगस्त 2026 को शिकायतें जांच के लिए प्राप्त हुई थीं। जांच के दौरान शिकायतकर्ताओं के बयान और दस्तावेजों के आधार पर आरोपों की पड़ताल की गई। पुलिस ने प्रथम दृष्टया अपराध बनना पाए जाने के बाद प्रकरण दर्ज किया। मामले की जांच निरीक्षक तरुण सिंह भाटी को सौंपी गई है। अब पुलिस जमीन के मूल रिकॉर्ड, रजिस्ट्री, भुगतान और संबंधित पक्षों के बीच हुए लेनदेन की जांच करेगी।
पहले प्लॉट बेचे, बाद में जमीन के सौदे का आरोप
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि निपानिया क्षेत्र के सर्वे नंबर 260/1, 261/1, 261/2 और 264/1 की करीब 22 हेक्टेयर जमीन पर पिनाकल प्रोजेक्ट के तहत प्लॉटिंग की गई थी। इनमें से कुछ जमीन पर प्लॉट काटकर ग्राहकों को बेचे जाने के बावजूद बाद में जमीन के अन्य सौदे किए गए। शिकायत में करीब 9.30 एकड़ जमीन को जेएसएम देवकॉन से जुड़ी फर्म को बेचे जाने का भी उल्लेख है। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि जमीन के पूर्ववर्ती लेन-देन और उस पर किए गए प्लॉटों की बिक्री के बावजूद बाद के दस्तावेजों में जमीन की स्थिति को अलग तरीके से दर्शाया गया।
बंधक प्लॉट बेचने का भी आरोप
मामले में नगर निगम के पास बंधक रखे गए प्लॉटों की बिक्री का आरोप भी लगाया गया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जमीन और प्लॉटों से जुड़े लेन-देन में करोड़ों रुपये की रकम शामिल थी। साथ ही दस्तावेजों में कथित हेरफेर और गलत जानकारी देने के आरोप भी लगाए गए हैं। क्राइम ब्रांच ने शिकायत में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 120-बी और 409 के तहत प्रकरण दर्ज किया है। अब जांच में जमीन की वास्तविक स्थिति, प्लॉट बिक्री, रजिस्ट्री, बंधक और अलग-अलग समय पर हुए जमीन सौदों की कड़ियां जोड़ी जाएंगी।
16 लोगों ने की थी पुलिस में शिकायत
मामले में 16 शिकायतकर्ताओं ने पुलिस से शिकायत की थी। शिकायत के बाद दस्तावेजों और जमीन से जुड़े लेन-देन की जांच की गई और इसके आधार पर एफआईआर दर्ज की गई। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटेगी कि जमीन के सौदों में किसकी क्या भूमिका थी और शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।
पहले भी विवादों में रहा है पिनेकल
इंदौर में पिनाकल समूह के ड्रीम्स, ग्रांड और डिजायर प्रोजेक्ट लंबे समय से विवादों में रहे हैं। निवेशकों की रकम फंसने, प्रोजेक्ट पूरे नहीं होने और जमीन से जुड़े विवादों को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में नई एफआईआर ने पिनाकल समूह से जुड़े पुराने विवादों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। अब क्राइम ब्रांच की जांच में जमीन के पुराने दस्तावेज, रजिस्ट्री, प्लॉट बिक्री, बैंकिंग लेन-देन और संबंधित संस्थाओं से प्राप्त रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होंगे। जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और लोगों की भूमिका सामने आने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।



