वर्षों से भाजपा के प्रति वफादारी निभा रहे इंदौर के पास शहर के लिए लड़ने वाला कोई नेता नहीं। दशकों से यहां सांसद, विधायक और महापौर भाजपा के चुने जाते रहे हैं, लेकिन शहर के नाम पर मुंह पर पट्टी बांध लेते हैं। वर्तमान में इस शहर ने भाजपा को 9 विधायक चुन कर दिए, लेकिन जब संगठन की तरफ से नियुक्तियों की बारी आती है तो उसे एक भी स्थानीय नेता काबिल नहीं मिलता।
इंदौर के लोग उस समय दंग रह गए थे, जब शहर में सैकड़ों अच्छे नेता होने के बावजूद 2001 में देवास के नेता जयपाल सिंह चावड़ा को इंदौर विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष बना दिया गया था। उस समय भी किसी स्थानीय भाजपा नेता ने पुरजोर तरीके से इसका विरोध नहीं किया। चावड़ा साहब अपनी ही दुकान सजाते रहे और जब पद से हटे तो इंदौर से विधानसभा का टिकट भी मांगने लगे। उनके कार्यकाल में इंदौर में क्या-क्या काम हुए, इसकी जानकारी भाजपा के साथ ही शहर की जनता को भी है।
इसी का नतीजा निकला कि एक बार फिर प्रदेश संगठन आईडीए में एक बाहरी नेता शैलेंद्र बरुआ को बिठाने की तैयारी कर चुका है। भाजपा नेता ही कह रहे हैं कि लगभग सबकुछ फाइनल है, सिर्फ घोषणा बाकी है। ऐसे में इंदौर के साथ फिर से ठगी की तैयारी पूरी की जा चुकी है।
इसके बावजूद स्थानीय भाजपा नेता चुप है। हां, हमेशा अपनी बात खुलकर रखने रहे वरिष्ठ नेता सत्यनारायण सत्तन ने जरूर आवाज उठाई है। उन्होंने कहा है कि अगर बाहरी व्यक्ति को इंदौर विकास प्राधिकरण में नियुक्त किया जाता है,, तो इंदौर और यहां के कार्यकर्ता उसे स्वीकार नहीं करेंगे।
अब सत्तन गुरु ने तो आवाज उठा दी है, क्योंकि उन्हें किसी पद की चाह नहीं और न ही किस परवाह है। अगर इंदौर के भाजपा नेता यह चाहते हैं कि उनका वजूद बचा रहे तो उन्हें सत्तन गुरु की आवाज बुलंद करनी चाहिए।
अगर आप सिर्फ अपनी दुकान चलाने के चक्कर में चुप रहे…और आपके संगठन की मनमानी चलती रही तो…वह दिन दूर नहीं जब इंदौर में सांसद, महापौर और विधायक भी बाहरी जिलों से लाए जाएंगे…
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