दिल्ली रेस क्लब पर चला बुलडोजर, केंद्र के कब्जे में 53 एकड़ जमीन

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दिल्ली के रेस क्लब पर चला बुलडोजर, 53 एकड़ जमीन पर केंद्र का कब्जा

नई दिल्ली। दिल्ली के ऐतिहासिक दिल्ली रेस क्लब पर केंद्र सरकार ने बुलडोजर चला दिया है। केंद्र द्वारा करीब 53 एकड़ परिसर का कब्जा लेने के बाद 27 अगस्त को क्लब के पुराने ढांचों को ढहा दिया गया। कार्रवाई में घोड़ों के अस्तबल, विनिंग पोस्ट, बुकमेकर रिंग और रेसिंग से जुड़ी अन्य संरचनाएं भी शामिल थीं। इसके साथ ही दिल्ली में करीब एक सदी से चली आ रही इस रेसिंग विरासत पर फिलहाल विराम लग गया है।

कोर्ट से नहीं मिली थी राहत

सरकार की यह कार्रवाई पटियाला हाउस कोर्ट के उस आदेश के बाद हुई है जिसमें दिल्ली रेस क्लब लिमिटेड को कोर्ट ने तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया था। क्लब ने एस्टेट ऑफिसर के बेदखली आदेश पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की थी लेकिन कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा था कि क्लब को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त मौका दिया गया था, लेकिन वह इस मौके का प्रभावी तरीके से इस्तेमाल नहीं कर सका।

प्रशासन ने लिया जमीन का कब्जा

पटियाला हाउस कोर्ट से अंतरिम राहत नहीं मिलने के बाद भूमि एवं विकास कार्यालय और केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जमीन का औपचारिक ट्रांसफर कराया। यह ट्रांसफर जैसी है जहां है के आधार पर किया गया। कागजी कार्रवाई पूरी होते ही परिसर में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी गई।

32 साल पहले खत्म हो गई थी लीज

सरकार के मुताबिक रेस क्लब की इस जमीन की लीज दिसंबर 1994 में ही खत्म हो गई थी। इसके बाद किसी नए दस्तावेज के जरिए लीज का नवीनीकरण नहीं हुआ। केंद्र सरकार की तरफ से कोर्ट में दलील दी गई थी कि लीज खत्म होने के बाद क्लब सरकारी जमीन पर अनधिकृत रूप से काबिज था। यही सरकार की कार्रवाई का सबसे बड़ा आधार बना।

क्लब की मुख्य याचिका अभी कोर्ट में

हालांकि मामले की कानूनी लड़ाई पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। क्लब की मुख्य चुनौती अभी अदालत में विचाराधीन है और अगली सुनवाई 26 सितंबर को होनी है। फिलहाल अदालत से अंतरिम संरक्षण नहीं मिलने के कारण सरकार ने इंतजार करने के बजाय जमीन का कब्जा अपने हाथ में ले लिया है।

2013 में 3.48 करोड़ रुपये हुए थे जमा

क्लब ने बकाया राशि को लेकर सरकार द्वारा जारी मांग के बाद 2013 में करीब 3.48 करोड़ रुपये जमा किए थे। अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक 22 जुलाई 2013 को सरकार ने 3,48,82,723 रुपये की मांग की थी और क्लब ने 23 तथा 26 अगस्त 2013 को यह रकम जमा कर दी थी। हालांकि, बकाया रकम जमा करने के बावजूद लीज का नया नवीनीकरण नहीं हुआ। सरकारी पक्ष ने क्लब की लीज बढ़ाने की मांग को स्वीकार नहीं किया। इसके पीछे जमीन की जरूरत सरकारी और सार्वजनिक उद्देश्यों, जिसमें रक्षा और सुरक्षा से जुड़े उद्देश्य भी शामिल थे, बताई गई।
विवाद अदालत तक पहुंचा

केंद्र ने पहले भी क्लब को खाली करने के लिए नोटिस दिए थे। 1999 में भी बेदखली की कार्रवाई शुरू करने का प्रयास हुआ था, लेकिन मामला अदालत में चला गया। बाद में क्लब की ओर से लीज के विस्तार/नवीनीकरण की मांग की गई। मामला वर्षों तक कानूनी प्रक्रिया में उलझा रहा। 2026 में केंद्र ने फिर कार्रवाई तेज की। 12 मार्च 2026 को क्लब को जमीन खाली कर शांतिपूर्ण कब्जा सौंपने का नोटिस दिया गया। इसके बाद सार्वजनिक परिसर अधिनियम, 1971 के तहत प्रक्रिया आगे बढ़ी। दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने मई 2026 में निचली अदालत द्वारा कार्यवाही रोकने वाले आदेश को हटा दिया और कहा कि लीज की अवधि 1994 में समाप्त हो चुकी थी तथा उसके बाद कोई नवीनीकरण नहीं हुआ। अदालत ने यह भी माना कि लीज समाप्त होने के बाद यह अनधिकृत कब्जे की श्रेणी में आ सकता है।

11 अगस्त को आया बेदखली आदेश

कानूनी लड़ाई के बीच एस्टेट ऑफिसर ने 11 अगस्त 2026 को बेदखली का औपचारिक आदेश जारी किया। क्लब ने इस आदेश के खिलाफ अदालत का रुख किया और कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की। 25 अगस्त को क्लब को एक और बड़ा झटका लगा। दिल्ली की अदालत ने अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। उसी दिन सुप्रीम कोर्ट ने भी तत्काल हस्तक्षेप करने के बजाय क्लब को संबंधित जिला न्यायाधीश के समक्ष उपलब्ध कानूनी उपाय अपनाने को कहा। इसके बाद केंद्र सरकार ने जमीन का कब्जा लिया और अगले ही दिन परिसर में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू हो गई।

53 एकड़ और 84 एकड़ का क्या मामला है?

बताया जाता है कि मूल 1926 की लीज में जमीन का क्षेत्रफल 84.484 एकड़ दर्ज था। बाद में 25 जून 1985 को सरकार ने इसका एक बड़ा हिस्सा वापस लेकर सार्वजनिक उद्देश्यों के लिए आवंटित कर दिया था, जिसमें रक्षा मंत्रालय के लिए आवंटन भी शामिल था। क्लब के कब्जे में बचा हिस्सा बाद में करीब 53 एकड़ के रूप में विवाद का केंद्र बना। यानी आज जिस 53 एकड़ परिसर पर केंद्र ने कब्जा लिया है, वह मूल 1926 की पूरी 84.484 एकड़ लीज वाली जमीन से अलग स्थिति है।

Harish Fatehchandani
Harish Fatehchandanihttp://www.hbtvnews.com
Harish Fatehchandani is a dedicated journalist with over a decade of experience in the media field. He is respected for his consistent and honest reporting.

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