चेन्नई। तमिलनाडु विधानसभा में बुधवार को परिसीमन के मुद्दे पर विशेष प्रस्ताव पेश किया गया। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने केंद्र सरकार से मौजूदा 543 लोकसभा सीटों की संख्या को बरकरार रखने की मांग की। प्रस्ताव का मुख्य तर्क यह है कि जनसंख्या के आधार पर होने वाले परिसीमन से उन राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है।
प्रस्ताव में केंद्र से यह सुनिश्चित करने की मांग की गई है कि आगामी परिसीमन के कारण तमिलनाडु सहित दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व में प्रतिकूल बदलाव न हो। राज्य की राजनीति में यह मुद्दा लंबे समय से चर्चा में है। तमिलनाडु के राजनीतिक दलों का तर्क रहा है कि केवल जनसंख्या को आधार बनाने से परिवार नियोजन और जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को राजनीतिक नुकसान हो सकता है।
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543 सीटें बनाए रखने की मांग
मुख्यमंत्री विजय की ओर से पेश प्रस्ताव में मौजूदा लोकसभा सीटों की संख्या 543 पर बनाए रखने की बात कही गई है। इससे पहले तमिलनाडु में परिसीमन को लेकर हुई राजनीतिक चर्चाओं में यह आशंका जताई गई थी कि नई जनसंख्या गणना को आधार बनाने पर राज्यों के बीच लोकसभा सीटों का अनुपात बदल सकता है। इस मुद्दे पर तमिलनाडु में पहले भी सर्वदलीय स्तर पर विरोध दर्ज कराया जा चुका है। मार्च 2025 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक में जनसंख्या के आधार पर परिसीमन का विरोध करते हुए संघीय ढांचे और दक्षिणी राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की रक्षा की मांग की गई थी।
विपक्ष ने प्रस्ताव के प्रारूप पर उठाए सवाल
विधानसभा में प्रस्ताव को लेकर विपक्षी दलों की ओर से भी आपत्ति दर्ज की गई। रिपोर्टों के मुताबिक एआईएडीएमके ने परिसीमन के मुद्दे पर चिंता से असहमति नहीं जताई, लेकिन प्रस्ताव लाने के तरीके और राजनीतिक मंशा पर सवाल उठाए। पार्टी ने कहा कि महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का समर्थन किया जा सकता है, जबकि परिसीमन संबंधी प्रस्ताव के प्रारूप पर उसकी आपत्ति है। भाजपा और पीएमके ने भी प्रस्ताव का विरोध किया।
दक्षिणी राज्यों में प्रतिनिधित्व को लेकर चिंता
परिसीमन का विवाद सिर्फ तमिलनाडु तक सीमित नहीं है। दक्षिणी राज्यों की प्रमुख चिंता यह है कि आबादी के आधार पर सीटों के पुनर्वितरण से तेजी से बढ़ती आबादी वाले राज्यों का लोकसभा में प्रतिनिधित्व बढ़ सकता है, जबकि अपेक्षाकृत कम जनसंख्या वृद्धि वाले राज्यों की हिस्सेदारी घट सकती है। विभिन्न आकलनों में तमिलनाडु समेत कुछ दक्षिणी राज्यों पर संभावित असर का अनुमान लगाया गया है।
महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दा
तमिलनाडु का ताजा प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब केंद्र और राज्यों के बीच परिसीमन के भविष्य के स्वरूप को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। अब इस प्रस्ताव के बाद परिसीमन का मुद्दा संसद और राज्यों के बीच संघीय प्रतिनिधित्व को लेकर चल रही व्यापक बहस का एक और महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दा बन गया है।



