इंदौर। मध्यप्रदेश की राजनीति में कैलाश विजयवर्गीय भाजपा के एक ऐसे नेता हैं, जिनके संबंध दिल्ली तक होने के बावजूद खुद को कमजोर बताते हैं। वे कई बार सभाओं में सीएम के सामने बोले चुके हैं कि अधिकारी उनकी नहीं सुनते। लेकिन, इंदौर में उनके अलावा किसी की चलती कहां है? ताजा उदाहरण देख लीजिए-आखिर सरकारी रेवती रेंज पर मंत्रीजी ने पितृ पर्वत जमावट शुरू कर दी है या नहीं?
सबके सामने हो रहा कब्जा
पितृ पर्वत कैसे बना था, यह तो सबको पता ही होगा। अब पिछले कुछ समय से सरकारी यानी बीएसएफ की जमीन रेवती रेंज को पौधारोपण के बहाने मंत्री समर्थक अपना ठिया बना चुके हैं। सारे अधिकारी गाड़ी लेकर मंत्रीजी के पीछे भाग रहे हैं, सीएम से लेकर कई बड़े नेता और मंत्री अपनी मां के नाम पर वहां पौधे लगा रहे हैं। सबको नजरों में सबकुछ हो रहा है।
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अब तो केंद्रीय कानून मंत्री का भी लग गया ठप्पा
आज केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल भी शामिल हुए। वे भी अपनी मां के नाम से एक पौधा लगा आए। मंत्रीजी और उनके समर्थकों ने कानून मंत्री का जोरदार स्वागत किया। अब बताइए जिस जगह कानून मंत्री खुद हो आए, उसे आप कानून विरोधी कैसे बता सकते हैं।
पत्नी के नाम से तैयार हो गया शेड
रेवती रेंज की इस सरकारी जमीन पर एक बड़े टीन शेड से हॉल भी तैयार हो गया है। मंत्रीजी की पत्नी आशा विजयवर्गीय के जन्मदिन के दिन उन्हीं के नाम पर इसका उद्घाटन भी हो गया। वहां बड़ा सा बोर्ड लगा दिया गया है-आशा। नीचे लिखा है-एसोसिएशन फॉर सेल्फ हेल्प एक्शंस इंदौर।
दाल-बाफले की पार्टी भी होने लगी
सूत्र बताते हैं कि इस परिसर का उपयोग अब पार्टी एवं निजी कार्यक्रमों के लिए किया जा रहा है। परिसर में हॉल/शेड के अलावा किचन, स्टोर रूम और कुर्सियों की व्यवस्था भी की गई है। यह भी दावा किया जा रहा है कि यहां किसी भी कार्यक्रम के लिए डेकोरेशन और कैटरिंग वाले को बुलाकर आयोजन किया जा सकता है।
पितृ पर्वत के बाद राठौर को यहां का भी प्रभार
एमआईसी सदस्य राजेंद्र राठौर के पास पहले पितृ पर्वत का काम था। वहां के सारे निर्माण राजेंद्र राठौर ने ही कराए हैं। उनके अनुभव को देखते हुए रेवती रेंज के परिसर के संचालन और देखभाल की जिम्मेदारी भी मंत्रीजी ने राठौर को सौंप रखी है। बताया जा रहा है कि आप यहां 100-150 लोगों की दाल-बाफले आदि की पार्टी कर सकते है। फिलहाल इसके लिए कोई शुल्क नहीं है, आगे का पता नहीं।
कोई है जो आवाज उठा दे
इतना कुछ होने के बाद भी इंदौर के किसी जनप्रतिनिधि, अधिकारी या आम नागरिक की हिम्मत नहीं है कि वह आवाज उठा दे। सारे प्रशासनिक और पुलिस के अधिकारी वहां जाते हैं, बड़े-बड़े नेता आते हैं लेकिन किसी को कुछ दिखाई नहीं देता। अब आप ही बताइए यह जादू मंत्री विजयवर्गीय के अलावा इंदौर में कोई कर सकता है क्या?



