नई दिल्ली। नीट यूजी पेपर लीक को लेकर सीबीआई की चार्जशीट में कई खुलासे हुए हैं। लीक मामले में दाखिल चार्जशीट में कई डिजिटल और फोरेंसिक सबूतों का जिक्र किया है। इनमें पुणे की एक रिहायशी सोसायटी के एंट्री मैनेजमेंट एप का रिकॉर्ड भी शामिल है। इसी सोसायटी में एनटीए के केमिस्ट्री विषय के विशेषज्ञ और आरोपी पीवी कुलकर्णी रहते थे।
सीबीआई का दावा है कि परीक्षा से तीन दिन पहले ही सवाल लीक हो गए थे और उन्हें वॉट्सएप, टेलीग्राम और ऑफलाइन क्लासों के जरिए छात्रों तक पहुंचाया गया। सीबीआई के मुताबिक इस पूरे मामले में एनटीए से जुड़े कुछ विषय विशेषज्ञ, कोचिंग सेंटर संचालक, बिचौलिए और कई अन्य लोग शामिल थे।
👉 यह भी पढ़ें:
- NEET UG की ओएमआर शीट में गड़बड़ी, 6 अभ्यर्थी पहुंचे सुप्रीम कोर्ट, काउंसिलिंग से पहले सुनवाई की मांग
- NEET Paper Leak मामले पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा-अब गलतियों का सिलसिला खत्म करना होगा
- Paper Leak पर जागी सरकार, अब बिल लाने की तैयारी, 10 साल की कैद और 1 करोड़ तक का हो सकता है जुर्माना
- NEET पेपर लीक पर सोनिया गांधी का मोदी सरकार पर बड़ा हमला, बोलीं- ‘छात्रों की आवाज दबाने के बजाय जवाबदेही तय करे सरकार’
- Paper Leak Controversy: पीएम मोदी के फास्ट ट्रैक कोर्ट के ऐलान पर CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका का पलटवार, बोले- ‘मरहम नहीं, चोट की वजह का इलाज जरूरी’
- Paper Leak पर PM मोदी का बड़ा ऐलान! दोषियों को जल्द सजा के लिए बनेंगी Fast Track Courts, बोले—‘युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं’
कुलकर्णी ने क्लास लेकर बताए सवाल
सीबीआई के अनुसार, केमिस्ट्री के विषय विशेषज्ञ पी. वी. कुलकर्णी ने गोपनीयता की शपथ लेने के बावजूद 25 से 27 अप्रैल के बीच पुणे में “स्पेशल क्लास” चलाई। इन क्लासों में शामिल छात्रों को कथित तौर पर वही सवाल और जवाब लिखवाए गए जो बाद में NEET परीक्षा में आए। लातूर में भी कुछ छात्रों को इसी तरह की विशेष क्लास दी गई। जांच में “माय गेट” ऐप के रिकॉर्ड, मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड से यह पुष्टि होने का दावा किया गया है कि छात्र कुलकर्णी के घर पहुंचे थे। छात्रों की नोटबुक में लिखे सवाल और CBI के अनुसार लीक हुए पेपर आपस में मेल खाते हैं।
फिजिक्स के सवाल 25 हजार में
जांच में यह भी सामने आया है कि कुलकर्णी ने फिजिक्स का पेपर हासिल करने की भी कोशिश की थी। फिजिक्स विषय की विशेषज्ञ मनीषा हवालदार पर आरोप है कि उन्होंने 25 हजार रुपये लेकर फिजिक्स के सवाल लीक किए। जांच के अनुसार परीक्षा से आठ दिन पहले उनके मोबाइल में हाथ से लिखे सवाल मौजूद थे। उन्होंने ये सवाल दूसरे आरोपी तेजस शाह को लिखवाए, जिसने उन्हें आगे पहुंचाने का काम किया। CBI के मुताबिक मनीषा पूरे नेटवर्क में छात्रों और विषय विशेषज्ञों के बीच कड़ी का काम कर रही थीं। उन्होंने अभिभावकों से चार लाख रुपये तक लेकर छात्रों को ऑफलाइन क्लास में भेजा, पैसे इकट्ठा किए और बाद में WhatsApp के जरिए फिजिक्स के सवाल भी भेजे। आरोप है कि अगर वही सवाल परीक्षा में आते तो अतिरिक्त 50 हजार रुपये की मांग भी की गई। वहीं मनीषा गुरुनाथ मंडारे पर आरोप है कि उन्होंने अपने घर पर बायोलॉजी की क्लास लगाई।
राजस्थान में पहुंचाई पीडीएफ फाइल
सीबआई के अनुसार राजस्थान के सीकर में संचालित एक कोचिंग नेटवर्क के जरिए भी लीक पेपर बड़ी संख्या में छात्रों तक पहुंचाया गया। आरोप है कि 2 मई की रात परीक्षा से पहले PDF फाइल 40 से 50 छात्रों के बीच बांटी गई। एक कोचिंग संचालक ने इसे “सबसे संभावित प्रश्नपत्र” बताकर छात्रों में फैलाया। परीक्षा के बाद छात्रों ने वीडियो बनाकर दावा किया कि वही सवाल परीक्षा में आए। जांच में कई वॉट्सएप ग्रुप भी सामने आए हैं। इनमें “NEET 2026” और “FIFA World Cup 2026” नाम के ग्रुप शामिल हैं, जिनके जरिए कथित तौर पर सवाल और अन्य जानकारी साझा की गई।
सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल
सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार प्रश्नपत्र तैयार करने और अनुवाद की प्रक्रिया के दौरान एक ही विशेषज्ञ को चारों मास्टर सेट देखने का मौका मिलता था। विशेषज्ञों की ठीक से तलाशी नहीं होती थी और पूरे परिसर की निगरानी के लिए अलग कंट्रोल रूम भी नहीं था। इसी कमजोरी का फायदा उठाकर सवाल बाहर ले जाए गए। जांच में दिल्ली विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों की रिपोर्ट का भी जिक्र है। रिपोर्ट के अनुसार बायोलॉजी के लीक सवालों का आधिकारिक प्रश्नपत्र से 90 प्रतिशत तक और केमिस्ट्री के कई सेटों में लगभग 100 प्रतिशत तक मिलान पाया गया।
ब्यूटीशियन ने छात्रों को कोचिंग भेजा
सीबीआई के अनुसार, ब्यूटीशियन मनीषा संजय वाघमारे ने कुलकर्णी और मंधारे की अप्रैल में हुई विशेष कोचिंग कक्षाओं में छात्रों को भेजा था। वहां छात्रों की कॉपियों में विशेषज्ञों की ओर से बताए गए सवाल लिखे गए थे। कुछ सवालों को ‘महत्वपूर्ण’ और ‘बहुत महत्वपूर्ण’ के तौर पर चिह्नित किया गया था। एजेंसी के मुताबिक, यही सामग्री बाद में राजस्थान और हरियाणा तक छात्रों और बिचौलियों की एक श्रृंखला के जरिए पहुंचाई गई।
कोचिंग सेंटर संचालक भी आरोपी
सीबीआई ने कोचिंग सेंटर संचालक शिवराज रघुनाथ मुतगांवकर को भी आरोपी बनाया है। अधिकारियों के अनुसार, उसे एक बिचौलिए के जरिए कुलकर्णी से प्रश्नपत्र मिले थे, जिन्हें उसने पैसे लेकर अपने छात्रों के बीच बांटा।
इस तरह हुआ था पेपर लीक का खुलासा
CBI का कहना है कि 3 मई 2026 को परीक्षा खत्म होने के तुरंत बाद सीकर के एक केमिस्ट्री शिक्षक ने लीक PDF और असली प्रश्नपत्र का मिलान किया। सवालों के मेल खाने के बाद उन्होंने NTA के महानिदेशक को ईमेल भेजा। इसके बाद इस पूरे मामले की बड़ी जांच शुरू हुई। फिलहाल दिल्ली की फास्ट ट्रैक कोर्ट में CBI की चार्जशीट पर सुनवाई चल रही है।



