इंदौर। शहर इन दिनों भीषण जलसंकट से जूझ रहा है। कभी विधायक नाराज हो रहे हैं तो कभी नाराज लोग विधायक के घर प्रदर्शन कर रहे हैं। नगर निगम की टैंकर से जल वितरण की नि:शुल्क व्यवस्था पूरी तरह फेल हो चुकी है। नगर निगम के टैंकर भी हरे-हरे नोट देखकर ही आ रहे हैं। ऐसे में शहर नगर निगम के प्रमुख विभाग जलकार्य के प्रभारी अभिषेक शर्मा बबलू को ढूंढ रहा है।
लोग पुराने जलकार्य प्रभारी को कर रहे याद
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शहर के लोग इस मुसीबत में नगर निगम के पुराने जलकार्य प्रभारियों को याद कर रहे हैं, जो दिन-रात मैदान में जुटे रहते थे। इसमें सबसे ज्यादा चर्चा मधु वर्मा की हो रही है, जो बोरिंग होने पर रात-रात भर खड़े रहते थे और पानी निकलते ही खुशियां मनाते थे। मधु वर्मा के बाद के भी जलकार्य प्रभारी भी पूरी गर्मी जनता के बीच मैदान में जुटे रहते थे, लेकिन बबलू भिया का पता नहीं है।
कंट्रोल रूम और बैठकों में आते हैं नजर
वर्तमान जलकार्य प्रभारी बबलू शर्मा सिर्फ सरकारी बैठकों के अलावा कहीं नजर नहीं आ रहे। कंट्रोल रूम में महापौर के साथ भी वे नजर आए थे, लेकिन फील्ड में उनकी तलाश कोई नहीं कर पा रहा। भाजपा के नेता ही कह रहे हैं कि जलसंकट से ग्रस्त किसी भी वार्ड में बबलू शर्मा नहीं दिखे। फोन नहीं उठाने की शिकायत तो सबकी है।
पार्षद से लेकर विधायक तक परेशान
वर्तमान जलसंकट में पार्षद से लेकर विधायक तक परेशान हैं। पांच नंबर विधानसभा के विधायक महेंद्र हार्डिया पहले ही जलसंकट को लेकर महापौर के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं। वे जलसंकट से इतने त्रस्त थे कि उन्होंने महापौर हाउस पर धरने की चेतावनी तक दे डाली। शनिवार को विधानसभा दो के विधायक रमेश मेंदोला के घर भी जलसंकट को लेकर प्रदर्शन हो गया।
बयानबाजी के अलावा कुछ भी ठोस नहीं
विडंबना यह है कि जिम्मेदार एक-दूसरे पर ठिकरा फोड़ रहे हैं। जब महापौर को विधायकों ने इस मुद्दे पर घेरने की कोशिश की तो उनका जवाब था कि 2013 से लेकर 2020 तक नर्मदा का पानी इंदौर में लाने के कोई प्रयास नहीं हुए। इसी वजह से परेशानी आ रही है। अफसर नेताओं को और नेता अफसरों पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं, लेकिन पानी के लिए त्रस्त जनता को कोई राहत नहीं मिल रही।
बाकी काम में पीछे नहीं रहते बबलू भिया
नगर निगम के पार्षद से लेकर भाजपा नेता तक कह रहे हैं कि बाकी किसी फायदे वाले काम में बबलू भिया पीछे नहीं रहते। चाहे ठेका हो या कोई अन्य काम जहां फायदा दिखता है, बबलू भिया वहां हाजिर रहते हैं। अब जबकि सबकुछ मिल ही जाता है तो फील्ड में मेहनत कौन करे?



