गंदे पानी से मौतों के बाद थर्टी फर्स्ट की रात बोला इंदौर का राजवाड़ा-मुझे यहां से शिफ्ट कर दो, अब यह शहर रहने लायक नहीं

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कैलेंडर से 2025 का नमोनिशान कल से मिट जाएगा, लेकिन इंदौर को यह साल हमेशा याद रहेगा। ऐसा नहीं कि इस साल सौगातें नहीं मिलीं, लेकिन सौगातों से कहीं ज्यादा जख्मों के निशान रहे। यह साल सरकारी विभागों के लिए तो जैसे काल बनकर आया। 2025 ने कई विभागों को तो जैसे नंगा कर दिया।

यह साल एक बार फिर इंदौर को आठवीं बार नंबर वन लेकर आया, लेकिन दुख की बात यह रही कि इसी साल चूहों के कूतरने से प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में नवजात बच्चों की मौत हो गई। रही सही कसर जाते हुए दिसंबर ने पूरी कर दी, जब नगर निगम द्वारा सप्लाई किए गए गंदे पानी से कई लोगों की मौत हो गई। इंदौर की पहचान ही राजवाड़ा है। वहीं से सबकुछ शुरू होता है, वहीं खत्म। खुशी हो या गम राजवाड़ा ही इसका गवाह बनता है। मैंने सोचा, उसी से पूछ लेते हैं, कैसा रहा इंदौर में 2025 का अनुभव। अब उसने जो कहा-वह आप से शेयर कर रहा हूं-

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मैंने पूछा-2025 अब जा रहा है। इस साल तो तुम बहुत खुश हुए होगे। तुम्हारे आंगन में मध्यप्रदेश की कैबिनेट भी बैठी।

बोला राजवाड़ा-हां, खुशी तो हुई थी। हमारे पास मंत्री-संत्री तो आते रहते हैं, लेकिन सारे एक साथ दिखे। तब मुझे खूब सजाया-संवारा गया। ऐसा लगा मानों होलकरवंश में कोई शादी हो। अब क्या-क्या फैसले हुए और उनमें से किन-किन पर अमल हुआ, यह दीगर बात है।

मैंने कहा-तो फिर मुंह लटकाकर क्यों बैठे हो? मनाओ जीत का जश्न।

बोला राजवाड़ा-तुम कैसे पत्रकार हो? क्या तुम्हें पानी कांड पता नहीं?प्यासे को पानी पिलाने की होलकर वंश की परंपरा रही है। भारत की संस्कृति भी यही कहती है। राजा-महाराजा जगह-जगह प्याऊ खुलवाते थे। हमारे यशंवतराव होल्कर महाराज ने तो यशवंतसागर तालाब बना दिया। कई कुएं और बावड़ी बनवाए और ये दिन-रात माता अहिल्या का नाम लेने वाले जहरीला पानी पिलाकर लोगों को मार रहे हैं। अरे, इनपर कुछ लिखो।

मैंने कहा-इन पर लिख ही तो रहे हैं। अखबारों में फोटो भी छपा है, खबरें भी छपी हैं।

बोला राजवाड़ा-हां, देखा है मैंने भी। जिसका काम शहर को पानी बांटना है, वह गंदे पानी से लोगों के मरने के बाद भी पार्टी मना रहा है। कोई झूला झूल रहा है तो कोई नगर निगम की फाइलों से मुंह ढांकने की कोशिश में लगा है।

मैंने कहा-कार्रवाई भी तो हुई है। तीन लोग सस्पेंड हुए हैं। नगरीय प्रशासन मंत्री बस्ती में डेरा डाले बैठे हैं। महापौर के आंसू नहीं रुक रहे।

बोला राजवाड़ा-छोटी मछलियों पर कार्रवाई से क्या फायदा? अगर कुछ करना ही है तो बड़ों पर हाथ डालो? मगरमच्छों को पकड़ो।

मैंने कहा-जांच के लिए कमेटी भी बनी है। जांच होगी तो बड़े भी पकड़े जाएंगे।

बोला राजवाड़ा-सैकड़ों साल से यहीं बैठा हूं। कभी दोषी पकड़े गए हैं आज तक? जिस तरह से मातमपुर्सी करने में सभी जुटे हैं, कुछ नहीं होने वाला। सबको पता है दोषी कौन है, फिर भी उसे बचाने में ही पूरी जान लगा देगी जांच कमेटी।

मैंने कहा-चलो यह तो एक घटना हुई, जिसके कारण तुम दु:खी हो। बाकी साल तो बहुत अच्छा ही रहा।

बोला राजवाड़ा-तुम कैसे पत्रकार हो। क्या अच्छा रहा इस साल। पूरे प्रदेश में लोगों की जान बचाने वाले एमवाय अस्पताल में नवजात बच्चों को चूहे कूतर गए। पूरे देश में इंदौर की नाक कट गई और यहां डॉक्टर सिर्फ यह साबित करने में लगे रहे कि उनकी मौत चूहे के कूतरने से नहीं हुई है। जैसे अभी भागीरथपुरा में पानी को बचाने की कोशिश हो रही है।

मैंने कहा-फिर भी इंदौर शहर को कई सौगातें 2025 मिली हैं और आगे भी मिलने जा रही हैं। बीआरटीएस टूट गया, मेट्रो का सफर कर रहे हो, अब तो खुश हो जाओ?

बोला राजवाड़ा-मुझे शर्म आती है तुम्हारी सोच पर। बीआरटीएस टूटने को अपनी उपलब्धि मानते हो। अरे जब तोड़ना ही था, तो बनाया क्यों? और जहां तक रही मेट्रो की बात, इसका क्या फायदा हो रहा है, यह किसी से छुपा नहीं है। इसकी फाइल कभी अंडरग्राउंड, तो कभी एलिवेटेड हो जाती है। देख लेना आगे भी इसकी हालत बीआरटीएस जैसी ही होगी।

मैंने कहा-तुम काफी बुजुर्ग हो, लगता है सठिया गए हो। तुम्हें इंदौर में कुछ भी अच्छा नहीं लगता। यहां आज भी संस्कार और संस्कृति जिंदा है, इससे तो इनकार नहीं कर सकते?

बोला राजवाड़ा-मुझे भी इसी बात का गर्व है और इसी ताकत की वजह से आजतक यहां खड़ा हूं, लेकिन जानते हो इस मामले में इंदौर तंगदिल होता जा रहा है। ऐसा लगता है कि यहां के संस्कार और संस्कृति में मिलावट होने लगी है, अगर ऐसा नहीं होता तो बेचारे राजा रघुवंशी को हनीमून के बहाने ले जाकर उसकी बीबी ही क्यों मार देती?

इतना कहकर रोने लगा राजवाड़ा। मेरी आंखें भी हो गईं थी नम और सवाल भी नहीं बचे थे। इसलिए उसे 2025 की तरह अलविदा कह लौट आया।

Ardhendu Bhushan - Consulting Editor
Ardhendu Bhushan - Consulting Editorhttp://www.hbtvnews.com
Ardhendhu Bhushan is a senior consulting editor with extensive experience in the media industry. He is recognized for his sharp editorial insight and strategic guidance.

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