पुणे हवाई अड्डे पर बड़ा व्यवधान: वायुसेना के लड़ाकू विमान में खराबी से रनवे बंद, कई उड़ानें रद्द—अब सेवाएं बहाल

Date:

भारतीय वायु सेना के एक लड़ाकू विमान में तकनीकी खराबी आने के कारण पुणे हवाई अड्डा का रनवे अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा, जिससे उड़ान सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं और कई एयरलाइनों की दर्जनों उड़ानें रद्द करनी पड़ीं।

वायुसेना के अनुसार, शुक्रवार देर रात लैंडिंग के दौरान विमान के अंडरकैरेज में खराबी आ गई, जिससे वह रनवे पर ही फंस गया। इस वजह से रनवे पूरी तरह अवरुद्ध हो गया और एहतियात के तौर पर सभी उड़ानों का संचालन रोक दिया गया।

इस घटना के चलते कई एयरलाइनों की उड़ानें प्रभावित हुईं।एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने शुरुआती अनुमान में बताया था कि रनवे को खाली कराने और परिचालन बहाल करने में लगभग 4 से 5 घंटे का समय लग सकता है। प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत और विमान को हटाने का काम किया गया, जिसके बाद शनिवार सुबह उड़ानों का प्रस्थान और आगमन फिर शुरू कर दिया गया।

गौरतलब है कि पुणे हवाई अड्डा नागरिक और सैन्य दोनों तरह की उड़ानों के लिए अहम केंद्र है, इसलिए रनवे बंद होने से खासकर व्यस्त समय में उड़ानों के पूरे शेड्यूल पर असर पड़ा।

Abhilash Shukla (Editor)
Abhilash Shukla (Editor)http://www.hbtvnews.com
Abhilash Shukla is an experienced editor with over 28 years in journalism. He is known for delivering balanced, impactful, and credible news coverage.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

Recent News
Related

आपको याद होगा नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने लोकसभा में अमित शाह को क्या कहा था? प्रियंका ने कहा था-गृह मंत्रीजी हंस रहे हैं। सारी तैयारी पहले से कर ली है। चाणक्य भी जिंदा होते तो आश्चर्य में पड़ जाते। प्रियंका के कहने का मतलब था कि पूरा विपक्ष आपकी चालाकी को समझ चुका है। और हुआ यही, इस बार विपक्ष ने चाणक्य की चालाकी चलने नहीं दी। भले ही विपक्ष भाजपा पर इस बिल के माध्यम से अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने का आरोप लगा रही है, लेकिन हम नहीं मानते। इसके बावजूद विपक्ष ही नहीं आम जनता के मन में यह सवाल है कि पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में विधानसभा चुनाव के बीच ही संसद का विशेष सत्र बुलाकर इस बिल को लाने की क्या जरूरत थी? चलो यह भी मान लिया कि बिल लाना जरूरी था, फिर पूरे देश में नारी शक्ति वंदन कैंपेन क्यों चलाया जा रहा था। भाजपा हर जिले, गांव-कस्बे में यह आयोजन कर रही थी और सारे वरिष्ठ नेता नारी शक्ति बिल का गुणगान कर रहे थे। चुनाव सभाओं में भी इसका जमकर इस्तेमाल किया गया। विपक्ष यह भी सवाल उठा रहा था कि महिला आरक्षण विधेयक साल 2023 में ही पारित हो चुका है, फिर इसकी जरूरत क्यों? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर गृह मंत्री अमित शाह तक फुल कॉन्फिडेंस में थे कि इस बार यह बिल जरूर पास होगा। जब सारे हथियार फेल हो गए तो पीएम मोदी ने बिल पर मतदान से पहले एक अपील की-मैं सभी सांसदों से कहूंगा... आप अपने घर में मां-बहन-बेटी-पत्नी सबका स्मरण करते हुए अपनी अंतरात्मा को सुनिए ...। आप में से बहुतों को याद होगा कि पूर्व प्रधानमंत्री बीपी सिंह ने मंडल कमीशन के समय भी संसद में ऐसी ही अपील की थी, लेकिन विपक्ष सरकार की मंशा को समझ गया था और सरकार की हार हुई थी। आपने महिला आरक्षण बिल की शर्त में लिखा कि आरक्षण तभी लागू होगा जब अगली जनगणना और उसके बाद सीटों का 'परिसीमन' होगा। कांग्रेस समेत इंडिया गठबंधन के दलों ने आरोप लगाया कि सरकार परिसीमन करके एक राजनीतिक साजिश रचने की कोशिश कर रही है। माना कि आप राजनीति के चाणक्य हैं, लेकिन यह भी सच है कि चाणक्य दोबारा पैदा नहीं हो सकते… और यह भी सच है कि अगर आप चाणक्य जैसे भी होते तो इस बिल के गुब्बारे में इतनी हवा नहीं भरते…