राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज की महाकाल की पूजा, मंदिर परिसर में सीएम यादव के साथ लगाई झाड़ू

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उज्जैन। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज उज्जैन में थीं। उन्होंने महाकाल मंदिर में पूजा की। राष्ट्रपति ने मंदिर परिसर में सीएम डॉ. मोहन यादव के साथ झाड़ू भी लगाई। उन्होंने उज्जैन-इंदौर सिक्स लेन हाईवे का भूमिपूजन कर स्वच्छता मित्रों का सम्मान भी किया। इस दौरान उन्होंने सफाई के मामले में मध्यप्रदेश की जमकर तारीफ की।

राष्ट्रपति ने कहा कि महाकाल की नगरी उज्जैन में सदियों से संस्कृति और सभ्यता की परंपरा अस्तित्व में है। उज्जैन अंतरराष्ट्रीय व्यापार का केंद्र भी रहा है। राष्ट्रपति ने कहामैंने अपनी जनसेवा की यात्रा स्वच्छता के कार्य से ही की थी। नोटिफाइडड एरिया काउंसिल की अध्यक्ष रहने के दौरान मैं प्रति दिन एक वार्ड से दूसरे वार्ड जाती थी। सफाई कार्य का निरीक्षण करती थी। इस दौरान अच्छे कामों को देखकर खुशी होती थी। मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई है कि मध्यप्रदेश के कई शहरों को सफाई मित्र सुरक्षित शहर घोषित किया गया है।

सीएम ने कहा-सफाई हमारा गौरव

सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश ने स्वच्छ भारत अभियान में देशभर में दूसरा स्थान पाया है। इंदौर सात बार से देश का सबसे स्वच्छ शहर बना हुआ है। सबसे स्वच्छ राजधानी का अवार्ड भी भोपाल को मिला है। यह हमारा गौरव है। सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में स्वच्छता कर्मचारियों को केंद्र सरकार द्वारा उनके शहर को दी गई रेटिंग के हिसाब से रुपये दिए जाएंगे। जिस शहर की रेटिंग एक हो उसके सभी सफाईकर्मियों को एक हजार रुपये, दो रेटिंग वालों को दो हजार रुपये। उज्जैन को तीन रेटिंग मिली है, इसलिए यहां के सफाईकर्मियों को 3 हजार रुपये दिए जाएंगे। कार्यक्रम में उज्जैन के पांच सफाई मित्रों को सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति ने उज्जैनइंदौर सिक्स लेन हाईवे का वर्चुअल भूमि पूजन भी किया। कार्यक्रम के बाद राष्ट्रपति ने महाकाल मंदिर में पंचामृत अभिषेक पूजन किया। महाकाल लोक भी देखा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महाकाल मंदिर में झाड़ू लगाकर सफाई भी की।

उज्जैन आने वाली 10 वीं राष्ट्रपति

राष्ट्रपति के आगमन पर महाकाल मंदिर को विशेष रूप से सजाया गया था। झांझ और डमरू की ध्वनि से राष्ट्रपति का स्वागत किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की यह पहली उज्जैन यात्रा है। वे उज्जैन आने वाली 10 वीं राष्ट्रपति हैं। । उन्होंने महाकाल महालोक का भ्रमण कर पाषाण से भगवान शिव और सप्त ऋषि की मूर्तियां बनाते हुए पुरी (ओडिशा) के शिल्पकारों से संवाद किया।

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