इंदौर के भागीरथपुरा में गंदे पानी से मौतों का सिलसिला जारी, अब तक 30 मौत, रिपोर्ट-रिपोर्ट खेल रहे हैं अधिकारी

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इंदौर। इंदौर के भागीरथपुरा में गंदे पानी से मौतों का सिलसिला अभी जारी है। बुधवार को 30वीं मौत हो गई। विडंबना यह कि इस मामले में जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों का रवैया अभी भी लीपापोती वाला ही है। अधिकारी इस समस्या के निराकरण की बजाए बचने के बहाने ढूंढ रहे हैं। अधिकारियों द्वारा तैयार रिपोर्ट पर हाईकोर्ट भी नाराजगी जता चुका है। जनप्रतिनिधि भी इस मामले से पल्ला झाड़ने में जुटे हैं।

बुधवार को भागीरथपुरा में रहने वाले 62 वर्षीय लक्ष्मी रजक की मौत हो गई। उन्हें दिन पहले उल्टीदस्त की शिकायत हुई थी। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था परिजनों ने बताया कि भर्ती के दौरान उनकी किडनी भी खराब होने की जानकारी मिली। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भागीरथपुरा के खूबचंद की दूषित पानी से मंगलवार को मौत हो गई थी। बुधवार को उनके परिजनों ने अंत्येष्टि से पहले सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन किया। हालांकि, अब भर्ती मरीजों की संख्या सिर्फ 6 रह गई हैं। इनमें से 3 आईसीयू में हैं। एक वेंटिलेटर पर है। अभी भी तीन लोग जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। इस कांड को एक माह पूरा हो रहे हैं, लेकिन अभी-भी पूरी बस्ती में साफ पानी नहीं मिल पाया है और न ही अफसर यह बता पाए कि दूषित पानी के कारण आखिर इतनी मौतें कैसे हो गईं?

न नेता न अफसर, किसी ने नहीं दिया ध्यान

इस मामले में कई सरकारी जांचें हुईं और आयोग का गठन भी हो चुका है। मामला कोर्ट में है, लेकिन अब तक किसी भी जिम्मेदार के खिलाफ कोई आपराधिक केस दर्ज नहीं हुआ है। 29 दिसंबर को भागीरथपुरा बस्ती के 20 मरीज दो अलग-अलग निजी अस्पतालों में भर्ती हुए थे। 30 दिसंबर को अस्पताल में भर्ती एक व्यक्ति की पहली मौत हुई थी। इन मौतों के पीछे नगर निगम की भारी लापरवाही उजागर हुई है। बस्ती की पाइपलाइनें 30 साल से ज्यादा पुरानी और जर्जर हो चुकी हैं। भागीरथपुरा से जुड़ा नगर निगम का जोन शिकायतों के मामले में शहर में दूसरे स्थान पर है। पिछले दो माह में यहां सबसे ज्यादा गंदे पानी की शिकायतें मिली थीं, लेकिन अफसरों ने उन पर ध्यान नहीं दिया।

रिपोर्ट-रिपोर्ट खेल रहे अधिकारी

इस मामले में अब तक अधिकारी सिर्फ रिपोर्ट-रिपोर्ट ही खेल रहे हैं। हाई कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई के दौरान भी रिपोर्ट के साथ खेलने का सिलसिला जारी रहा। इस दौरान 23 मौतों की रिपोर्ट पेश की गई, जिसमें से 16 मौतें दूषित पानी से मानी हैं, जबकि चार को लेकर असमंजस की स्थिति बताई है। वहीं तीन की मौत दूषित पानी से नहीं मानी है। जहां सरकारी रिपोर्ट में 16 मौतों को जलजनित बीमारी से जोड़ा गया है, वहीं याचिकाकर्ताओं ने मृतकों की संख्या लगभग 30 बताई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने रिटायर्ड जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एकल सदस्यीय जांच आयोग बनाया है।

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