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इंदौर। विधानसभा एक के भागीरथपुरा में गंदे पानी से हुई मौतों के मामले में गुरुवार को हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में सुनवाई हुई। इसमें जांच आयोग ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट पेश की है। कोर्ट ने आयोग को एक माह में विस्तृत रिपोर्ट पेश करने को कहा है। इस मामले में अगली सुनवाई 6 अप्रैल को होगी।
गुरुवार को हुई सुनवाई में एक सदस्यीय जांच आयोग की ओर से एक प्रारंभिक रिपोर्ट पेश की गई है। कोर्ट आयोग को एक कर्मचारी को नियुक्त करने को कहा है। मामले में भागीरथपुरा से जुडे़ लोगों, रहवासियों जो की शिकायतें, समस्याएं, आवेदन, साक्ष्य, सबूत, आवेदन आदि जो वे भी देते हैं वह समन्वय बनाकर आयोग को देगा। आयोग ने नगर निगम से इस मामले से जुड़े रिकॉर्ड मांगे थे, जो उसे नहीं उपलब्ध कराए गए हैं। कोर्ट ने नगर निगम को निर्देश दिए कि वह 10 दिनों में कमेटी को प्राथमिकता से रिकॉर्ड पेश करें।
कोर्ट ने लगाई थी कड़ी फटकार
इसके पहले हुई सुनवाई में कोर्ट ने सरकार और नगर निगम को कड़ी फटकार लगाई थी। कोर्ट ने तब रिपोर्ट को आई–वॉश करार दिया था। कोर्ट ने माना कि यह मामला गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति से जुड़ा है और स्वच्छ पेयजल का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने रिटायर्ड जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एकल सदस्यीय जांच आयोग गठित करने के निर्देश दिए थे।
सरकार ने कबूली थी 16 मौतें
पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के समक्ष कहा गया है कि डेथ ऑडिट में 16 मौतें दूषित पानी से होना पाई गई हैं, बाकी मौतों का ऑडिट नहीं हो पाया है। कोर्ट ने अफसरों से पूछा था कि इसका आधार क्या है? क्या मृतकों के शवों का पोस्टमॉर्टम किया गया है? विसरा रिपोर्ट कहां है? लेकिन उसका जवाब अफसर ठीक से नहीं दे पाए थे। भागीरथपुरा में दूषित पानी से अब तक 36 मौतें हो चुकी हैं, जबकि साढ़े चार सौ से ज्यादा लोगों को अस्पताल में भर्ती किया गया था।



