वायनाड। अपने भाई राहुल गांधी द्वारा छोड़ी गई सीट वायनाड से चुनाव लड़ रहीं प्रियंका गाधी वाड्रा ने प्रचार अभियान की कमान संभाल ली है। इस दौरान वे इमोशनल कार्ड खेलने की कोशिश कर रही हैं। अपने पिता, मां, भाई से जुड़े किस्से शेयर कर रही हैं। बचपन याद कर रही हैं। सोमवार को प्रचार के दौरान उन्होंने मदर टेरेसा से जुड़ा अपने बचपन का किस्सा सुनाया।
प्रियंका ने कहा कि उनके पिता राजीव गांधी की हत्या होने के महीनों के बाद मदर टेरेसा मेरे घर आईं थी और मुझे बेसहारा लोगों के लिए काम करने के लिए कहा था। उस वक्त मुझे बुखार था, मैं अपने कमरे से बाहर नहीं गई थी और तब वो खूद मेरे कमरे में आईं और मेरे सर पर अपना हाथ रखा। इसके बाद उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे एक गुलाबी फूल दिया। फिर उन्होंने मुझसे अपने साथ काम करे कहा। करीब 5-6 साल के बाद मैं उनके यहां काम करने पहुंची। मेरा काम बच्चों को पढ़ाना, बाथरूम साफ करना और खाना बनाना था। इसी के बाद मैं यह समझ पाई कि सेवा का मतलब क्या होता है। प्रियंका ने कहा मैंने देखा कि वायनाड में हुए भूस्खलन के दौरान कैसे सभी समुदायों ने एक-दूसरे की मदद कर रहे थे। आप सभी ने सबकी मदद की। आप सब साहसी लोग हैं।
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प्रियंका ने कहा-सीट छोड़ने से राहुल हैं दुखी
प्रियंका ने कहा कि वायनाड की सीट छोड़ने से राहुल गांधी बहुत दुखी हैं। आपने तब उनका साथ दिया जब सबने मुंह मोड़ लिया। राहुल कहते हैं कि आप उनके लिए परिवार जैसे हैं। इससे पहले भी भाई राहुल गांधी ने वायनाड के लोगों को इमोशनली जोड़ने की कोशिश की थी। राहुल ने कहा था कि पिता के निधन के समय प्रियंका 17 साल की थीं, उन्होंने ही मेरी मां का ख्याल रखा है।
चुनाव की कमान अनुभवी नेताओं के हाथ
प्रियंका गाधी के चुनाव की केरल के सभी वरिष्ठ नेताओं ने संभाल रखी है। इनमें केरल के पूर्व मंत्री और वर्तमान में वंदूर से विधायक ए.पी. अनिल कुमार, कालपेट्टा के विधायक टी. सिद्दीकी, आदिवासी नेता आई.सी. बालाकृष्णन, कांग्रेस के एकमात्र जिला पंचायत अध्यक्ष शमासद मरक्कार और राज्यसभा सांसद केरल महिला कांग्रेस अध्यक्ष जेबी मैथर शामिल हैं। ये सभी नेता इस लोकसभा सीट के विभिन्न समुदायों में अपनी पकड़ रखते हैं। इनके अलावा युवाओं की एक बड़ी टीम सोशल मीडिया से लेकर नए मतदाताओं को प्रभावित करने में सक्रिय है।



