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नई दिल्ली। विपक्ष के जोरदार हंगामे के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित साह ने तीन विधेयक पेश किए। शाह के बिल पेश करते ही लोकसभा में बवाल हो गया। इस विधेयक में गंभीर आपराधिक आरोपों में लगातार 30 दिन तक जेल में रहने पर प्रधानमंत्री, मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों को पद से हटाने का प्रावधान है। विपक्ष के जोरदार विरोध के बाद अमित शाह ने तीनों पेश किए गए विधेयकों को जेपीसी यानी संयुक्त संसदीय समिति भेजने का प्रस्ताव रखा।
भारी हंगामे के कारण सदन की बैठक करीब 45 मिनट के लिए दिन में तीन बजे तक स्थगित कर दी गई। सदन की बैठक दो बार के स्थगन के बाद दो बजे शुरू हुई तो केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025, संघ राज्य क्षेत्र शासन (संशोधन) विधेयक, 2025 और जम्मू कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025 पेश किए जाने का प्रस्ताव रखा। इसी के बाद तीनों बिलों के विरोध में विपक्षी सांसद नारेबाजी करने लगे। विपक्ष की ओर से एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी, कांग्रेस के मनीष तिवारी और केसी वेणुगोपाल, आरएसपी के एन के प्रेमचंद्रन और समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव ने विधेयकों को पेश किए जाने का विरोध किया। उन्होंने यह भी कहा कि नियमों के अनुसार सात दिन पहले विधेयक पेश करने का नोटिस सदस्यों को नहीं दिया गया और इसकी प्रतियां भी समय पर नहीं वितरित की गईं। जब प्रेमचंद्रन ने कहा कि तीनों विधेयकों को सदन में पेश करने की सरकार को इतनी हड़बड़ी क्यों है? इस पर गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रेमचंद्रन जल्दबाजी की बात कर रहे हैं, लेकिन इसका सवाल इसलिए नहीं उठता क्योंकि मैं इस विधेयक को संसद की संयुक्त समिति को सौंपने का अनुरोध करने वाला हूं। संयुक्त समिति जो लोकसभा और राज्यसभा के सदस्यों, पक्ष और विपक्ष के सदस्यों की बनेगी और इस पर विचार करके विधेयक को आपके सामने लाएगी।
शाह की गिरफ्तारी की भी उठी बात
कांग्रेस सांसद वेणुगोपाल ने आसन की अनुमति से बोलते हुए कहा कि भाजपा के लोग कह रहे हैं कि यह विधेयक राजनीति में शुचिता लाने के लिए लाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि क्या मैं गृह मंत्री से पूछ सकता हूं कि जब वह गुजरात के गृह मंत्री थे, उन्हें गिरफ्तार किया गया था तब क्या उन्होंने नैतिकता का ध्यान रखा था? गृह मंत्री ने वेणुगोपाल के बयान पर जवाब देते हुए शाह ने कहा कि मैं रिकॉर्ड स्पष्ट करना चाहता हूं। मैंने गिरफ्तार होने से पहले नैतिकता के मूल्यों का हवाला देकर इस्तीफा भी दिया और जब तक अदालत से निर्दोष साबित नहीं हुआ, तब तक मैंने कोई संवैधानिक पद स्वीकार नहीं किया।
विपक्षी सांसदों ने कॉपी फाड़कर फेंका
इस बिल को लेकर लोकसभा में विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया। इतना ही नहीं विपक्षी सांसदों ने बिल को फाड़कर उन्हें अमित शाह की ओर उछाला। यह तीनों विधेयक अलग–अलग इसलिए लाए गए हैं, क्योंकि केंद्र सरकार, राज्य सरकार और केंद्र शासित राज्यों के नेताओं के लिए अलग–अलग प्रावधान हैं। संविधान के 130वें संशोधन विधेयक पेश होने के दौरान विपक्षी सांसदों ने सत्ता पक्ष को घेर लिया और गृह मंत्री का माइक मोड़ने की कोशिश की। सत्ता पक्ष के सांसद रवनीत बिट्टू, कमलेश पासवान, किरेन रिजिजू और सतीश गौतम ने गृह मंत्री का बचाव किया और विपक्षी सांसदों को रोकने की कोशिश की।



