पीएम मोदी को अपशब्द कहने पर पटना में बवाल, कांग्रेस कार्यालय पर भाजपा का हंगामा, आपस में भिड़े कार्यकर्ता

Date:

पटना। राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा के दौरान एक व्यक्ति द्वारा पीएम मोदी को अपशब्द कहे जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। शुक्रवार को पटना के प्रदेश कांग्रेस कार्यालय पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने बवाल मचा दिया। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं से भिड़ंत भी हुई। हालत इतनी बिगड़ गई की पुलिस को लाठियां भांजनी पड़ी।

बताया जाता है कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस कार्यालय पर हमला किया, परिसर में खड़े एक ट्रक का शीशा तोड़ दिया और वोटर अधिकार यात्रा के पोस्टर फाड़ डाले। हमलावरों ने कांग्रेस के झंडे को भी नोचकर फेंक दिया, जिससे तनाव बढ़ गया। बताया जा रहा है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सभी घटक दलों के नेता और कार्यकर्ता कुर्जी मोड़ से सदाकत आश्रम तक पैदल मार्च कर आए। वे राहुल गांधी का पुतला दहन करने वाले थे। लेकिन इससे पहले ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं से उनकी भिड़ंत हो गई। दोनों पक्षों के बीच झड़प हुई। इसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सदाकत आश्रम के अंदर से एनडीए कार्यकर्ताओं पर पथराव शुरू कर दिया। इस बीच एनडीए के कार्यकर्ता भी उग्र हो गए और उन्होंने जमकर तोड़फोड़ की। मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाबूझाकर शांत कराया। पुलिस के समझाने के बाद एनडीए के कार्यकर्ता वापस चले गए, लेकिन कांग्रेस कार्यकर्ताओं का विरोध प्रदर्शन जारी रहा। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सदाकत आश्रम के सामने अशोक राजपथ को जाम कर दिया और प्रदर्शन शुरू कर दिया। उन्होंने एनडीए कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उनका कहना था कि बिना किसी अपराध के भाजपा के कार्यकर्ताओं ने उन पर हमला किया और प्रदेश मुख्यालय की संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रकों के शीशे भी तोड़े गए और भाजपा उनकी आवाज दबाने की कोशिश कर रही है।

एक कार्यकर्ता ने कहे थे अपशब्द

उल्लेखनीय है कि वोटर अधिकार यात्रा के दौरान सिंहवाड़ा प्रखंड के अतरबेल चौक पर मंच से अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य मो. नौशाद ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अपशब्द कहे थे। इसके बाद इस मामले में भाजपा जिलाध्यक्ष आदित्यनाथ नारायण मन्ना ने सिमरी थाने में प्राथमिकी कराई है। पुलिस ने आज गाली देने वाले आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।

Ardhendu Bhushan (Consulting Editor)
Ardhendu Bhushan (Consulting Editor)http://www.hbtvnews.com
Ardhendhu Bhushan is a senior consulting editor with extensive experience in the media industry. He is recognized for his sharp editorial insight and strategic guidance.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

Recent News
Related

- डॉ.प्रकाश हिन्दुस्तानी, वरिष्ठ पत्रकार हिन्दी फिल्म वाले दशकों बाद भी  भूतों का स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग  ऊंचा नहीं उठा पाए हैं।  बेचार भूतों  को अब भी वही पुरानी  हवेली  में गुजारा करना पड़  रहा है।  वह भी ऐसी जगह पर, जहां कनेक्टिविटी बहुत ही कमजोर होती है , सड़क है ही नहीं या  अच्छी नहीं है। हवेली या बंगले के  पीछे जंगल है। बिजली नहीं।  टेलीफोन लाइन नहीं है, मोबाइल  नेटवर्क मिलता नहीं है! बड़ी खस्ताहाल जिंदगी होती होगी बेचारों की!  कुछ तो रहम करो बेचारों पर ! क्यों कोई भूत किसी 'एंटीलिया', किसी 'अडोब', किसी 'मन्नत', किसी 'जलसा', किसी 'गुलिता', किसी 'बख्तावर' में कब्ज़ा ज़माने नहीं जाता? प्रियदर्शन की अक्षय कुमार वाली फिल्म भूत बंगला में  नवीनता नाम की चीज है ही नहीं। इसका नाम भूत बंगला न होकर हेरा फेरी, भूल भुलैया, भागमभाग, हाउसफुल आदि कुछ भी हो सकता था। इसमें कुछ भी नया नहीं है। वही निर्देशक, वे ही मुख्य कलाकार, वैसी ही कहानी, वही बेमेल संगीत, वैसे ही बेतुके गाने,  व्हाट्सप्प पर घिस चुके वही जूने -पुराने जोक्स, भूतों की कहानी के वही पुराने टेम्पलेट्स, पंडितों की गढ़ी गई वही कहानी, वही कन्या की शादी का चैलेंज, वही वीएफएक्स से बनाये भूत और चमगादड़ें, अँधेरे से डरता भूत, बीसियों मीडिया पार्टनर्स के जरिये वही स्टार रेटिंग और वही ठगाते दर्शक ! अक्षय कुमार,परेश रावल,राजपाल यादव और असरानी ने इस फिल्म में एक भी ऐसा सीन नहीं किया कि याद रखा जाये। ऊपर से सह निर्माता अक्षय कुमार हैं, जिन्हें पूरे समय स्क्रीन पर बने ही रहना है। अकेले उनका मोनोलॉग संभव नहीं था, इसलिए फिलर के रूप में जिशु सेनगुप्ता,तब्बू,वामिका गब्बी,मनोज जोशी,मिथिला पालकर,राजेश शर्मा, भावना पाणी, ज़ाकिर  आदि को रोल दिए गए होंगे।  ये लोग भी अक्षय के साथ हो परदे पर होते हैं। असुर की तपस्या से लेकर देवता-राक्षसों का युद्ध, गंगा की पवित्रता, शिव जाप का माहात्म्य, भाई बहन का प्यार, प्रेत बाधा और उसका उपचार, परेश रावल और राजपाल यादव की फूहड़ कॉमेडी, सोशल मीडिया में रील्स जैसे दोहरे अर्थवाले एक्शन शुरू में थोड़ा दिलचस्प लगते हैं, लेकिन जब उनका दोहराव होता है और अंत में 'भूत -वीर' हीरो प्रकट होता है, तब कहानी की कलई खुल जाती है। 'भूल भुलैया' टाइप कहानी 'स्त्री' बनते- बनते रह जाती है। कॉमेडी, हॉरर और थ्रिलर  का मेल कराने की कोशिश में फिल्म हींग के तड़केवाली खीर बनकर रह गई है। भूत बंगला में किसी भी दृश्य का प्रभाव टिक ही नहीं पाता क्योंकि फिल्म बार बार ट्रेक बदल देती है और फिर वापस उसी घिसे पिटे ट्रेक पर आ जाती है। फिल्म में बार बार परेश रावल के पिछवाड़ा सुलगने पर आप कितनी बार हंस सकते हैं? हंस भी सकते हैं या नहीं? किसी असुंदर व्यक्ति का नाम सुन्दर हो तो यह हर किसी के लिए हास्य नहीं हो सकता। फिल्म बार बार दर्शकों से कहती है - हंसो, जबकि दर्शक को उस सीन पर नहीं, तीन तीन लेखकों और तीन तीन निर्माताओं पर हंसी आती है। इसे देखना टाला जा सकता है। टालनीय फिल्म ! डॉ.प्रकाश हिन्दुस्तानी, वरिष्ठ पत्रकार