डेली कॉलेज की हेड गर्ल निया बाहेती के आरोपों पर प्रिंसिपल ने दिया जवाब, जांच के लिए बनाई कमेटी, आरोपों को बताया निराधार

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इंदौर। इंदौर के प्रतिष्ठित डेली कॉलेज को लेकर पिछले काफी दिनों से सोशल मीडिया पर खबरें चल रही हैं। छात्र लगातार डेली कॉलेज प्रशासन पर अनियमितता के आरोप लगा रहे थे। इसको लेकर हेड गर्ल निया बाहेती ने इस्तीफा तक दे दिया था। अब डेली कॉलेज प्रशासन की नींद खुली है। प्रिंसिपल ने अधिकृत बयान जारी कर इस पर चिन्ता जताते हुए अधिकांश आरोपों को निराधार बताया है।

डेली कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. गुनमीत बिंद्रा ने 1 सितंबर को इस संबंध में अधिकृत बयान जारी किया है। इसमें उन्होंने कहा है कि डेली कॉलेज में प्रत्येक छात्र की सुरक्षा, सम्मान और कल्याण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने लिखा है कि कल यानी रविवार को एक पत्र प्राप्त हुआ है। यह पत्र सोशल मीडिया पर पहले ही प्रसारित हो चुका था। इस संबंध में मैं स्पष्ट करना चाहती हूं कि उसकी विषयवस्तु घटनाओं की पूरी वास्तविकता को नहीं दर्शाती है। इस संवेदनशील स्थिति के दौरान, स्कूल का हर निर्णय सहानुभूति से प्रेरित था। हालांकि इसके लिए विभिन्न स्तरों पर कठिन समझौते करने पड़े।

स्कूल का आंतरिक मामला सार्वजनिक हो गया

प्राचार्य ने अपने पत्र में कहा है कि यह दुर्भाग्यपूर्ण और बेहद दुखद है कि स्कूल का एक आंतरिक मामला सार्वजनिक हो गया है। छात्रों द्वारा झूठ बोलने, अलगाव, अनुशासनहीनता, अधूरे कार्य दायित्वों के आरोपों, तैयारियों और चल रहे DCMUN 2025 सम्मेलन के दौरान विवाद अधिक गहरा गया है। इस कठिन समय में, DCMUN 2025 के छात्र, डेली कॉलेज के अन्य छात्र, कई पूर्व छात्र संस्थान, उसके संकाय एकजुटता के साथ आगे आए हैं।

अनुशासन समिति का किया गठन

प्राचार्य ने अपने बयान में कहा है कि मामले की निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ जांच के लिए एक अनुशासन समिति का गठन किया गया है। इस बीच स्कूल को 50 से ज्यादा छात्रों से लिखित आवेदन प्राप्त हुए हैं। अनुशासन समिति इसकी जांच करेगी, जिसे हम सार्वजनिक भी करेंगे। डेली कॉलेज हमेशा सच्चाई, निष्पक्षता और हर बच्चे के समग्र विकास के लिए खड़ा रहेगा।

निया बाहेती के आरोपों को बताया निराधार

उल्लेखनीय है कि डेली कॉलेज की हेड गर्ल निया बाहेती ने काफी सारे आरोप लगाकर अपना इस्तीफा दे दिया था। इस पर करीब 50 छात्रों ने अपनी प्रतिक्रिया दी थी। इन छात्रों का कहना है कि वे और DCMUN 2025 की आयोजन समिति, इस बात पर प्रकाश डालना चाहते हैं कि कैसे निया बाहेती ने स्कूल, उसके शिक्षकों, छात्रों और प्रधानाचार्य पर निराधार आरोप लगाए हैं। छात्रों ने कहा है कि उनका पूरा एजेंडा DCMUN 2025, संस्थान की प्रतिष्ठा, प्रधानाचार्य और साथ ही नामित छात्रों व शिक्षकों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना था। इसके कई कारणों में से एक यह था कि निया को उम्मीद थी कि सब कुछ उनके तरीके से होगा और वह छात्रों, शिक्षकों, प्रधानाचार्य और पूरे संस्थान से यही अपेक्षा रखती थीं। निया और उनकी उम्मीदों को पूरा करने के लिए कई बदलाव किए गए। प्रधानाचार्य निया बहेती की स्थिति से अवगत थीं और उन्होंने कुछ ऐसे फैसले लिए जो DCMUN आयोजन समिति के पक्ष में नहीं थे, केवल इसलिए क्योंकि वह मानसिक तनाव में थीं और यह एक बेहद संवेदनशील मामला था। प्रधानाचार्य और संस्थान इस पूरी स्थिति में उनके साथ खड़े रहे, हालांकि ये फैसले पूरी समिति के खिलाफ थे। इन फैसलों ने हम समेत उसके कई छात्रों को परेशान किया, लेकिन आखिरकार, निया के मानसिक स्वास्थ्य को समझते हुए, वह अपने फैसले पर कायम रही। उस गंभीर स्थिति को समझते हुए, हम सभी ने उस एक छात्रा के मानसिक स्वास्थ्य के लिए समझौता किया। फिर भी, ये झूठे दावे किए गए, और अंततः, हम इस संस्थान, प्रधानाचार्य, शिक्षकों, छात्रों और सच्चाई के साथ खड़े हैं।

निया बाहेती ने क्या लगाए थे आरोप

निया बाहेती ने अपने डेढ़ पन्ने के इस्तीफे में कई तरह के आरोप लगाए थे। उन्होंने लिखा कि प्रिंसिपल ने उनका साथ नहीं दिया। निया ने लिखा-बच्चे मजाक उड़ा रहे हैं कि यहां कुछ होना नहीं है। वह चिल्लाएगी, बच्चों से लिखवाएगी, कभी फैसले सुनाएगी, फिर ताकतवर माता-पिता बोर्ड तक पहुंच जाएंगे और फिर वह आंसू बहाएगी और फिर कुछ नहीं होगा और फिर बच्चे और भी घमंडी हो जाएंगे। निया ने लिखा कि अगर स्कूल की हेड गर्ल का मजाक उड़ाया जा सकता है, गाली-गलौज की जा सकती है, मानसिक रूप से तोड़ा जा सकता है तो आपके बच्चों का क्या होगा? आपके प्रतिनिधियों का क्या होगा? उस अगली पीढ़ी का क्या होगा जो अच्छा, सभ्य और सिद्धांतवादी बनने की हिम्मत रखती है? निया ने लिखा-मैंने अपनी औकात से ज़्यादा सहा है। अदिति मैम की पूरी जानकारी में मेरा मज़ाक उड़ाया गया और मुझे परेशान किया गया। जिन्होंने खुद मुझे अनगिनत बार रुलाया। सिर्फ उन्हीं को पता है कि किन कारणों से उन्होंने उनका साथ दिया और मेरे अपमान को और गहरा किया। निया ने लिखा-मैम, आपके फ़ैसले में पिछले तीन दिनों में आए बदलावों ने मुझे बहुत मानसिक तनाव में डाल दिया है। यह नेतृत्व नहीं है। यह शिक्षा नहीं है। निया ने अंत में लिखा कि सच्चाई हमेशा रहेगी, चाहे कोई उसे कितना भी दबाने की कोशिश करे।

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