दुनिया के सबसे रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) को लेकर ईरान ने ऐसा फैसला लिया है, जिसने वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अमेरिका और ईरान के बीच हुए 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MOU) के बाद अब इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने वाले सभी जहाजों के लिए नई परमिट व्यवस्था लागू कर दी गई है।
नई व्यवस्था के तहत अब कोई भी जहाज सीधे होर्मुज जलडमरूमध्य से नहीं गुजर सकेगा। जहाजों को पहले ईरान द्वारा स्थापित नई संस्था पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी (PGSA) के पास आवेदन करना होगा और अनुमति मिलने के बाद ही आगे बढ़ने की इजाजत मिलेगी।
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ईरान के नए नियमों के अनुसार जहाजों को कम से कम 48 घंटे पहले आवेदन जमा करना होगा। आवेदन में जहाज का नाम, झंडा, IMO नंबर, कार्गो का विवरण, मालिक की जानकारी, बीमा दस्तावेज, चालक दल की संख्या और उनकी राष्ट्रीयता जैसी विस्तृत जानकारियां देना अनिवार्य होगा। अधूरी जानकारी मिलने पर आवेदन खारिज भी किया जा सकता है।
ईरान का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना, यातायात नियंत्रण बेहतर बनाना और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करना है। PGSA प्रत्येक आवेदन की समीक्षा करेगी और स्वीकृति मिलने पर एक विशेष परमिट जारी किया जाएगा, जो केवल एक बार के पारगमन और अधिकतम पांच दिनों के लिए वैध होगा।
समझौते के तहत शुरुआती 60 दिनों तक जहाजों से किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा। सुरक्षा, नौवहन सहायता, पर्यावरण संरक्षण और बीमा सेवाओं का खर्च फिलहाल ईरानी सरकार उठाएगी। हालांकि ईरान पहले ही संकेत दे चुका है कि भविष्य में इन सेवाओं के लिए शुल्क लागू किया जा सकता है, जिससे वैश्विक शिपिंग लागत बढ़ने की संभावना बन सकती है।
दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और बड़ी मात्रा में LNG (Liquefied Natural Gas) का परिवहन इसी मार्ग से होता है। इसलिए होर्मुज जलडमरूमध्य में लागू होने वाला हर नया नियम वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर सीधा असर डाल सकता है।
भारत, चीन, जापान और यूरोप के कई देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस मार्ग पर निर्भर हैं। ऐसे में विशेषज्ञों की नजर इस बात पर है कि भविष्य में यदि शुल्क बढ़ते हैं या नियम और सख्त होते हैं, तो इसका असर कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक महंगाई पर कितना पड़ सकता है।
क्या आपको लगता है कि ईरान की नई परमिट व्यवस्था से वैश्विक समुद्री सुरक्षा मजबूत होगी, या इससे तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर नया दबाव बनेगा? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।



