पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच ईरान की रणनीतिक चालों ने पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट को और गंभीर बना दिया है। अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति की जीवनरेखा माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की बढ़ती पकड़ ने वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ा दी है।
इस बीच संयुक्त राज्य अमेरिका ने इस मुद्दे से दूरी बनाते हुए एशियाई देशों को खुद पहल करने की सलाह दी है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा कि होर्मुज का मामला अमेरिका नहीं, बल्कि एशियाई देशों की समस्या है।
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ईरान ने संकेत दिया है कि वह दबाव की अपनी रणनीति को और आगे बढ़ा सकता है। ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने चेतावनी दी कि बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य को भी निशाना बनाया जा सकता है। यह बयान ऐसे समय आया है जब होर्मुज में जारी तनाव पहले ही वैश्विक शिपिंग और सप्लाई चेन पर भारी असर डाल रहा है।
गालिबाफ ने वैश्विक व्यापार की कमजोरियों पर सवाल उठाते हुए पूछा कि तेल, एलएनजी, गेहूं, चावल और उर्वरकों की कितनी बड़ी खेप इस मार्ग से गुजरती है और किन देशों व कंपनियों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। उनके इन सवालों से साफ है कि ईरान अपने रणनीतिक प्रभाव को अधिकतम करने की दिशा में सोच रहा है।
इसी बीच क्षेत्र में सैन्य तनाव भी बढ़ता जा रहा है। ईरान और उसके सहयोगियों ने “ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4” के तहत जवाबी हमले तेज कर दिए हैं, जिनमें इजराइल के अहम सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया।
ईरान का दावा है कि यह कार्रवाई उन हमलों का जवाब है, जिनमें उसकी ऊर्जा सुविधाओं और नागरिक ढांचे को नुकसान पहुंचाया गया। रिपोर्ट के अनुसार, इन हमलों में सैकड़ों नागरिकों की जान गई, जिनमें मिनाब के एक प्राथमिक विद्यालय में करीब 170 बच्चों की मौत भी शामिल है।
इस पूरे घटनाक्रम ने न सिर्फ पश्चिम एशिया को युद्ध के कगार पर ला खड़ा किया है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति को भी गंभीर खतरे में डाल दिया है।


