पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी हिंसा के बीच अब शांति की एक किरण दिखाई देने लगी है। इजराइल और लेबनान के बीच 10 दिनों का युद्धविराम लागू हो चुका है, जिससे दोनों देशों में राहत की भावना देखी जा रही है। खासतौर पर लेबनान में इस कदम के बाद जश्न का माहौल है और लोग इसे शांति की दिशा में एक अहम शुरुआत मान रहे हैं।
शुक्रवार से लागू हुए इस युद्धविराम की घोषणा पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा की गई थी। इसका उद्देश्य पिछले एक महीने से जारी उस भीषण संघर्ष को रोकना है, जिसमें अब तक 2,000 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं।
जैसे ही युद्धविराम प्रभावी हुआ, अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इसका स्वागत किया और दोनों पक्षों से संयम बनाए रखने तथा शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की अपील की। दुनिया भर के नेताओं और संगठनों ने इसे क्षेत्र में स्थिरता की दिशा में सकारात्मक कदम बताया है।
हालांकि, इस बीच हिजबुल्ला के बयान ने स्थिति को पूरी तरह शांत नहीं होने दिया है। संगठन ने युद्धविराम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह समझौता पूरे लेबनान क्षेत्र में समान रूप से लागू होना चाहिए। साथ ही, उसने इजराइल पर निशाना साधते हुए कहा कि “इजराइली दुश्मन” को किसी भी तरह की आवाजाही की स्वतंत्रता नहीं दी जानी चाहिए।
हिजबुल्ला ने आगे कहा कि लेबनान की जमीन पर इजराइली मौजूदगी को वह कब्जा मानता है और इसके खिलाफ विरोध करना लेबनान और उसके नागरिकों का अधिकार है। संगठन ने संकेत दिया कि आगे की स्थिति आने वाली घटनाओं पर निर्भर करेगी।
इस बयान से साफ है कि युद्धविराम के बावजूद हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। जहां एक ओर आम लोगों में शांति की उम्मीद जगी है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक और सैन्य स्तर पर तनाव अभी भी कायम है, जिससे आने वाले दिनों में इस समझौते की स्थिरता पर नजरें टिकी रहेंगी।


