भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा कल कर दी गई है। इसमें इंदौर की नई राजनीतिक चौकड़ी के प्रमुख किरदार गौरव रणदिवे को जबरदस्त तवज्जो दी गई है। इससे साफ जाहिर है कि प्रदेश भाजपा इंदौर की नई चौकड़ी के कामों से खुश है और उसे आगे बढ़ाना चाहती है।
आपको याद होगा कि पहली बार यह चौकड़ी इंदौर में एक होर्डिंग पर नजर आई थी। उस दिन हेमंत खंडेलवाल प्रदेश अध्यक्ष बने थे और उनकी नाम की घोषणा होने के साथ ही इंदौर में एक नए तरह का होर्डिंग नजर आने लगा था। इसमें गौरव रणदिवे, सावन सोनकर, एकलव्य सिंह गौड़ और मनोज पटेल एक साथ दिखाई दिए थे। इसके बाद से यह चौकड़ी हर राजनीतिक आयोजनों में भी साथ नजर आने लगी।
👉 यह भी पढ़ें:
- खुलेआम गुंडागर्दी पर उतरे भाजपा के विधानसभा 4 प्रभारी शेड़गे, संघ पदाधिकारी के साथ मारपीट के बाद पार्टी ने दिया नोटिस, प्रभार भी छीना
- मध्यप्रदेश में कहीं फेल न हो जाए राहुल गांधी का ‘नटराजन दांव’, अंतिम समय भाजपा कर सकती ‘खेला’
- Bihar Vidhan Parishad के लिए भाजपा ने भोजपुरी एक्टर पवन सिंह को बनाया उम्मीदवार, जदयू ने निशांत कुमार को उतारा
- K. Annamalai : तमिलनाडु में भाजपा की राजनीति से अलग हुए अन्नामलाई, नितिन नवीन ने मंजूर किया इस्तीफा
दरअसल इंदौर भाजपा में लंबे समय से राजनीतिक संतुलन बनाने की मांग उठती आ रही है। यहां वर्षों से भाजपा का एक गुट कब्जा करने की कोशिश करता रहा है। राजनीतिक नियुक्तियों से लेकर प्रशासन तक में दबाव-प्रभाव का इस्तेमाल करना और हर किसी की विधानसभा में घुस जाना इस गुट की फितरत है। यह बात भाजपा आलाकमान से लेकर सीएम डॉ.मोहन यादव तक पहुंचती रही है। यही वजह है कि चौकड़ी के प्रमुख किरदार गौरव रणदिवे को महामंत्री पद से नवाजा गया है। एक अन्य किरदार सावन सोनकर पहले से ही पदधारी हैं और मनोज पटेल तो विधायक हैं ही।
इंदौर के संदर्भ में भाजपा ने डॉ.निशांत खरे को उपाध्यक्ष बनाकर एक और पेचवर्क किया है। शायद भाजपा को महापौर के चुनाव में लगभग फाइनल होने के बाद भी डॉ.निशांत खरे को टिकट न देने की गलती का एहसास था। भाजपा को यह भी पता था कि एक युवा और पढ़े-लिखे पुष्यमित्र भार्गव को टिकट देने का असर इंदौर शहर पर कितना पड़ा है। आज भी जनता पार्टी को कोस रही है।
अब इतना तो तय है कि इंदौर भाजपा में कुछ भी एकतरफा नहीं होगा। बात-बात पर भोपाल और दिल्ली शिकायत करने की धमकी देने वाले नेता भी कमजोर पड़ेंगे। निश्चित तौर पर इससे भाजपा ही नहीं, इंदौर का भी भला होगा। वर्षों से एक गुट विशेष के कारण खुद को दबे महसूस कर रहे नेता व कार्यकर्ता भी अब खुलकर सांस ले सकेंगे।


