तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। राज्यपाल विश्वनाथ आर्लेकर द्वारा विजय की पार्टी से बहुमत साबित करने के लिए 118 विधायकों के समर्थन पत्र मांगे जाने के बाद आज प्रस्तावित शपथ ग्रहण टल गया है।
विजय की पार्टी ने कांग्रेस के 5 विधायकों के समर्थन के साथ कुल 112 विधायकों का समर्थन पत्र राज्यपाल को सौंपा है। विजय दो सीटों से चुनाव जीते हैं, इसलिए पार्टी की प्रभावी संख्या 107 मानी जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक विजय की पार्टी की विदुथलाई चिरुथिगल काची, पट्टाली मक्कल काची और वामपंथी दलों के साथ बातचीत जारी है, लेकिन अंतिम सहमति बनने में समय लग सकता है।
कांग्रेस ने राज्यपाल के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा है कि सबसे बड़ी पार्टी के नेता को सरकार बनाने के लिए बुलाना संवैधानिक जिम्मेदारी है और बहुमत के नाम पर विजय को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है। वहीं विजय की पार्टी ने इस पूरे मामले पर कानूनी विशेषज्ञों से राय लेने का फैसला किया है।
उधर द्रविड़ मुनेत्र कषगम विधायक दल की बैठक भी आज होने जा रही है, जिसमें नेता प्रतिपक्ष के चयन और आगे की रणनीति पर चर्चा होगी।
इसी बीच देर रात अन्नाद्रमुक ने अपने विधायकों को पुडुचेरी के एक विश्राम स्थल में भेज दिया। सूत्रों के अनुसार वहां पहुंचे विधायक सी वी षणमुगम खेमे के बताए जा रहे हैं। 32 विधायकों के वहां पहुंचने की उम्मीद है।
हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में विजय की पार्टी 108 सीटें जीतकर राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन सरकार बनाने के लिए जरूरी 118 सीटों के आंकड़े से पीछे रह गई। चुनाव परिणाम आने के बाद पार्टी विधायकों ने सर्वसम्मति से विजय को विधायक दल का नेता चुना था, जिसके बाद सरकार बनाने का दावा पेश करने का रास्ता साफ हुआ।
कांग्रेस ने पहले ही शर्तों के साथ समर्थन देने का संकेत दिया है, जबकि वामपंथी दल और छोटे क्षेत्रीय दल अभी अंतिम फैसला लेने से पहले आपसी चर्चा में जुटे हुए हैं।